Sunday, 19 April 2015

मोदी का संदेश से नहीं, संस्कार मिला है स्वच्छता का




 जबलपुर के एक मोहल्ला आनंदकुंज गढ़ा में तड़के कोई सेवा निवृत सहकारी निरीक्षक नर्मदा प्रसाद का पता - ठिकाना खोजते हुए पहुंचे और वहां मौजूद किसी से पूछे तो उसे जवाब मिलेगा ... वो देखो जो व्यक्ति पट्टे वाली चड्डी और बनियान पहनकर झाडू लगा रहें हैं वही हंै नर्मदा प्रसाद दुबे। इस वृद्धजन की दिनचर्या सफाई अभियान से ही शुरू होती है।
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इस देश को सबसे पहले स्वच्छता का संदेश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिया था और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समग्र देश के भाजपा नेताओं , विभिन्न संगठनों व संस्थाओं सहित आला प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में झाडू थमवा दी । प्रधानमंत्री ने स्वच्छता का संदेश नए अंदाज से दिया है, किन्तु 76 वर्षीय आनंदकुंज, दुबे कालोनी गढ़ा निवासी नर्मदा प्रसाद दुबे के लिए ये संदेश कोई नया नहीं है। उनके संस्कार में रचा बसा है स्वच्छता का पुनीत कार्य। ब्राम्हण जाति के नर्मदा प्रसाद  प्रतिदिन झाडू लेकर मोहल्ले की सड़क साफ करते हैं और स्वयं फावड़े से गंदी नाली की सफाई करते हैं। इसमें उनको किसी तरह की लज्जा नहीं आती है। उनका कार्य नेताओं की तरह सिर्फ दिखावा और फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहता है। दरअसल वे वास्तव में सफाई करते हैं और इस कार्य में उन्हें आनंद की अनूभूत होती है। अकेले ही सही वे पिछले 60 साल से प्रतिदिन मोहल्ले की सफाई करते आ रहे है। यह जरूर है कि जीवन के लम्बे समय में उनके घर बदला, निवास स्थान बदला लेकिन जहां भी वे रहें, अपने मोहल्ले की नाली सड़क और स्वयं का घर को स्वच्छ रखा।
 76 वर्ष में भी गजब की उर्जा
नर्मदा प्रसाद दुबे 76 वर्ष के हो गए है लेकिन सुबह लगभग पूरी कॉलोनी में

झाडू लगाते है। यह काम 5-10 मिनिट का नहीं घंटो चलता है। सन 1978 से वे यहां रह रहें हैं। उनको इस कार्य की प्रेरणा कहे या संस्कार अपने पिता स्वर्गीय जगन्नाथ दुबे से मिले हैं जो मूलत: डिंडौरी के किसान थे। उनके पिता अपने घर, गौशाला तथा गांव की सड़क की सफाई करते थे। यही गुण उनके संस्कार में बचपन से आ गए ।
गजब के मेघावी
नर्मदा प्रसाद एक पिछड़े जिलें और ग्रामीण परिवेश के हैं लेकिन गजब के मेघावी बचपन से रहे हैं। गांव में स्कूल नहीं होने के कारण उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई जबलपुर में हॉस्टल में रखकर की तथा उनको राष्ट्रीय छात्रवृति 9 वीं से 12 वीं तक लगातार मिली। 12 वीं तक पढ़ाई करने के बाद तुरंत ही उनकी नौकरी हाईकोर्ट में बाबू के पद पर हो गई लेकिन यहां कुछ दिन ही नौकरी करने के बाद आगे पढ़ाई करने के लिए नौकरी छोड़ दी तथा बीए, एमए तथा एलएलबी की। दो बार पीएससी में पास हुए लेकिन जब वे साक्षात्कार के लिए पहुंचे थे और साक्षात्कार लेने वालों को पता चलता था कि किस परिवेश से वे हैं तो उन्हें साक्षात्कार में फेल कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सहकारिता विभाग में नौकरी कर ली और सहकारी  निरीक्षक के रूप में सेवानिवृत हुए।
 स्वच्छता मूल प्रवृति
नर्मदा प्रसाद दुबे का कहना है कि मानव ही नहीं जीवजन्तु में स्वच्छता मूल प्रवृति है। जानवर भी सफाई पसंद होता है किन्तु आदमी को स्वच्छता के लिए कार्य करने में लज्जा क्यों आती है? मेरे समझ में नहीं आता है।
नर्मदा प्रसाद दुबे


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