Saturday, 18 April 2015

कचरा निष्पादन के लिए जबलपुर नगर निगम की विशेष पहल

   कचरा से बनेगी 10 मेगावाट बिजली  जबलपुर। जबलपुर सहित देश के अधिकांश महानगरों में कचरा निष्पादन एक बड़ी समस्या बन चुकी है और ये कचरा पर्यावरण के लिए बेहद घातक साबित होता रहा है। कचरे से बिजली बनाने के प्लांट दिल्ली जैसे महानगरों में वर्षो पहले लगे थे लेकिन वे भी लगभग बंद हालत में है। देश में अब तक बिजली उत्पादन के लिए जितने इंसीनेरेटर हैं, उसके धूआ ही बड़े पर्यावरण प्रदूषण का कारण बना है लेकिन जबलपुर में कचरे से बिजली उत्पादन की यूनिट डाल रही कंपनी का दावा है कि प्रदूषण नियंत्रण के पूरे मापदंडों के अनुरूप यूनिट कार्य करेगी। करीब 175 करोड़ की लागत से तैयार होने जा रहा इंसीनेरेटर दुनिया की आधुनिक तकनीकी इस्तेमाल की जा रहा है।  जापान सहित अन्य देशों में कचरे से बिजली उत्पादन की अनेक यूनिटें एस्सेल ग्रुप द्वारा चलाए जा रहे हैं।  एस्सेल गु्रप एवं नगर निगम के बीच वर्ष 2013 मे तीन वर्ष का अनुबंध हो चुका है। नगर निगम ने कठौंदा में दस एकड़ भूमि प्लांट बनाने तथा कचरा निष्पादन के लिए लीज पर कंपनी को दी है। यह प्रोजेक्ट की सफलता जबलपुर के साथ प्रदेश के लिए कचरा निष्पादन के लिए एक बड़ी दिशा तय करेगा। दरअसल कचरा निष्पादन के अब तक जो भी तरीके अपनाए जाते रहे हैं। हरके तकनीकियों में अनेक खामिया रही है और वे पूर्णत: कारगर सबित नहीं हुई। महानगरों में बढ़ती डिस्पोजन संस्कृति ने कचरा की खपत कई गुना बढ़ा दी है।  अब तक कचरा निष्पादन की दुनिया में जितनी भी विधियां चल रही है उसमें सर्वाधिक उपयोगी कचरा को जलाने की समझी गई है लेकिन इसके लिए सवाधानी बेहद जरूरी है। कचरा जलाने से जबदस्त वायु प्रदूषण का खतरा  रहता है लेकिन इसको नियंत्रित सीमा में  आधुनिक तकनीकी से रखा जा रहा है जबलपुर में स्थापित होने वाले कचराघर से बिजली उत्पादन में उक्त तकनीकियों का इस्तेमान होना है।   कई कंपनियां कर रही काम  यूनिट तैयार करने का मशीनरी वर्क हिटैची कंपनी को दिया गया है जिसने यूनिट के लिए मशीने बनाने का काम अपने वर्कशाप में प्रारंभ कर दिया है। इसी तरह मुजफ्फर नगर की जगदम्बा एण्ड कंपनी को सिविल वर्क का काम सौंपा गया है। सिविल वर्क का काम तेजी से चल रहा है। फरवरी 2013 में एग्रीमेंट होने के बाद से सिविल वर्क प्रारंभ हो गया है। कंपनी सूत्रों का दावा है कि 65-70 प्रतिशत कार्य हो चुका है और दिसम्बर 2015 तक कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा और यूनिट भी प्रारंभ हो जाएगी। इसी तरह बिजली की लाइन लगाने का काम भी चल रहा है।  चार टन कचरा की खपत  जबलपुर शहर में प्रतिदिन 3-4 कचरा प्रतिदिन एकत्र होता है। यूनिट में प्रतिदिन 3-4 सौ टन कचरे की डिमांड रहेगी, जबकि यूनिट की क्षमता 6 सौ टन प्रतिदिन की है। साढेÞ चार सौ टन कचरा प्रतिदिन मिलता रहा तो यूनिट साढेÞ 10 मेगावाट तक बिजली उत्पादन करेगी। कंपनी को बिजली विभाग से करार हो चुका है जो बिजली कंपनी से खरीदेगी।  50मीटर उंची हो चिमनी  इस यूनिट को तैयार करते वक्त प्रदूषण का ध्यान में रखते हुए 50 मीटर उंची चिमनी तैयार की जाएगी, जिससे वायु मंडल में कम दबाव की स्थिति में धूआ नीचे न जमा होए।  20 रूपए टन खरीदेगी कचरा नगर निगम से कचरे को लेकर कंपनी के करार के तहत कंपनी के डम्पिंग  पिट तक कचरा पहुंचाने का काम नगर निगम का होगा। कंपनी 20 रूपए टन के भाव से कचरा खरीदेगी। इस कचरे में बिल्डिंग मटैरियल एवं अस्पतालों का कचरा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही मैटेलिक कचरा तथा नाले नालियों की सिल्ट नहीं होनी चाहिए।  यूनिट इसी वर्ष होगी शुरू कंपनी के चेयर मैन का जबलपुर दौरा हो चुका है। कंपनी दिसम्बर तक यूनिट प्रारंभ कर देगी। कचरे की कमी कंपनी को नहीं आएगी। छावनी परिषद ने भी नगर निगम को कचरा देने की पेशकश की है।  आशीष पाटकर  प्राजेक्ट मैनेजर, कंसल्टेंट कंपनी    डम्पिंग सेंटर की खामियां * डम्पिंग कचरों के कारण कचरे के पहाड़ खड़ें हो रहे हैं।  * डम्पिंग सेंटर की जगह भविष्य के लिए खराब हो जाती है।  * डम्पिंग सेंटर में पड़े कचरे को बाद में हटाने से जहरीली और पर्यावरण के लिए घातक गैस रिलीज होती हैं * कचरे से होकर भूमि में जाने वाला पानी स्वाइल एवं नेचरल वाटर को दूषित करता है।  ------------------------------------------------------------ बायोट्रीटमेंट भी असफल * कचरा को जैविक ट्रीटमेंट के तहत मिट्टी एवं खाद में बनाना कठिन कार्य है।  * वनस्पति एवं फूड के कचरा तो बायोट्रीटमेंट े दुरूस्त हो जाता है लेकिन  कैमिकल्स, पेट्रोलियम पदार्थ और पॉलीथीन विनष्ट नहीं होते है और यही पदार्थ प्रदूषण पैदा करते हैं।  ------------------------------------------

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