जबलपुर। नेपाल में 24 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकम्प के बाद आॅफर शॉक का सिलसिला जारी है। हिमालय स्थित फाल्ट में दोपहर के बाद कुछ अंतराल में सात झटके आए। ये झटके बिहार तथा उत्तरांचल में महसूस किए गए जबकि मध्य प्रदेश में दो भूकम्प के झटके लोगों ने महसूस किए है। भूकम्प विशेषज्ञों की माने तो नेपाल हिमालय में शुरू हुई भूकम्प की श्रंखला से प्रदेश को कोई खतरा नहीं है लेकिन प्रदेश में नर्मदा एवं सोनघाटी क्षेत्र में 80 से अधिक फाल्ट मौजूद है जो भूकम्प संवेदी है। इन भूकम्प की श्रंखला से फिलहाल यहां खतरा नहीं है लेकिन भूकम्प की भविष्यवाणी आज भी संभव नहीं है।
भारतीय सर्वे आॅफ इंडिया के सेंट्रल मुख्यालय के डायरेक्टर, वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुखोपाध्याय ने बताया कि नेपाल में 24 अप्रेल को जो विनाशकारी भूकम्प आया था, वह गौरी शंकर लिनियामेंट के करीब था। इस भूकम्प से इस लिनियामेंट की सक्रियता बढ़ गई है। इसके चलते गौरी शंकर लिनियामेंट से दूसरा भूकम्प आया है। इस भूकम्प एवं पूर्व में आए भूकम्प केन्द्र में अंतर है। पहले आए भूकम्प की गहराई 10 किलोमीटर थी जिससे उसका विनाशकारी प्रभाव ज्यादा रहा है, जबकि आज आया भूकम्प गहराई से आया था। करीब 19 किलोमीटर नीचे था जिससे विनाश कम हुआ है। तकनीकि तौर पर यह भूकम्प पूर्व भूकम्प का आॅफ्टर शॉॅक नहीं है लेकिन फिर भी इसे भू वैज्ञानिक आॅफ्टर शॉक की तरह आंकलन कर रहे है।
मात्र तीन भूकम्प महसूस हुए
बिहार तथा उत्तर भारत में तीन झटके महसूस किए गए है जबकि 4 मैग्नीट्यूट तीव्रता तक के सात भूकम्प दिन भर में आए है। इस भूकम्प से
मध्य प्रदेश के सोन एवं नर्मदा लीनियामेंट की प्लेट सक्रिय होने का खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि प्लेट अलग अलग गहराई पर स्थित होती है और उनके अपने कारण भूकम्प के रहते है लेकिन तीव्रता वाले भूकम्प के मददेनजर सावधानी रखना जरूरी है। कच्चे मकान खतरे का कारण यहां भी बन सकते है।
देश के अन्य हिस्सों के साथ मध्यप्रदेश प्रदेश के अनेक स्थलों में भूकम्प के झटके महसूस किए गए। पहला भूकम्प 7.3 मैग्नीट्यूट तीव्रता का12 बजकर 35 मिनिट 19 सेकेण्ड मं आया। इसका अक्षांस 86.0 डिग्री उत्तर तथा देशांतर 86.0डिग्री पूर्व था। ये भूकम्प 10 किलोमीटर की गहराई से था। इसी तरह दूसरा भूकम्प 1 बजकर 6 मिनट 54 सेकण्ड पर आया। इसका केन्द्र मामूली बदला है। दूसरे भूकम्प का केन्द्र 27.6 डिग्री अक्षांश उत्तर तथा देशांतर 86.1 डिग्र्री पूर्व रहा। इसके बाद कुछ कुछ अंतराल में 5 भूकम्प और दर्ज किए गए है, जो लगभग 4 मैग्नीट्यूट तक के थे। इन भूकम्पों के बाद आॅफटर शॉक दर्ज किए जा रहे हैं लेकिन उनकी तीव्रता कम है।
----------------------
वर्जन
मुताबिक शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, हरदा, होशंगाबाद, खंडवा तथा खरगौन भूकम्प के प्रति संवेदनशील हैं। यहां ये नर्मदा एवं सोननदी के फाल्ट पर स्थित है। ये सिस्मिक जोन 4 में स्थित हैं। यहां मध्यम तीव्रता 6 मैग्नीटूयड एवं उससे के भूकम्प आते है। भारतीय उप महाद्वीप में भूकम की सक्रिया को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। नेपाल के भूकम्प से प्रदेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
डॉ अनुपम काश्यिपी
मौसम विभाग भोपाल
No comments:
Post a Comment