जेपी मिश्रा
सीएसपी रांझी
अनुशासन प्रिय एवं कर्मठ पुलिस अधिकारियों के रूप में पुलिस विभाग में पहचाने जाने वाले नगर पुलिस अधीक्षक रांझी जेपी मिश्रा का मानना है कि विभाग में अब भी अनुशासन मौजूद है, किन्तु उनका व्यक्तिगत अनुभव यह भी है कि नए आ रहे पुलिस वालों में पुराने पुलिस वालों की तरह वो बात नहीं है। सन् 1981 बैच के सब-इंस्पेक्टर श्री मिश्रा जबलपुर सहित छिंदवाड़ा, सिवनी, बैतूल, शहडोल, सीधी तथा भोपाल में पदस्थ रह चुके हैं। वर्तमान में सन 2013 से सीएसपी रांझी हैं।
प्रश्न-पुलिस विभाग में बल की कमी मुख्य समस्या हैं, इससे कैसे निपटा जा रहा है।
उत्तर-पिछले कुछ सालो से भर्तियां तेजी से हुई है। स्टाफ की कमी से निपटने के लिए जनभागीदारी एवं समुदायिक पुलिसिंग का सहारा लिया जा रहा है। इसके साथ ही फोर्स को अपने कार्य में दक्ष एवं निपुण बनाया जा रहा है, जिससे उनकी क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग किया जाए।
प्रश्न-क्या पहले से अधिक दक्ष पुलिस वाले नौकरी में आ रहे हैं?
जवाब-इसका जवाब मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव एवं राय से देना चाहूंगा। पहले पुलिस का प्रशिक्षण बेहद कठिन था तथा कम संसाधनों में काम करते थे, लेकिन अब वो बात नहीं है।
प्रश्न-विभाग में अनुशासनहीनता की खबरे हमेशा सुर्खियों में रहती है, क्या पुलिस में अनुशासन खत्म हो रहा है?
जवाब-पुलिस एक फोर्स है और फोर्स बिना अनुशासन के संचालित नहीं हो सकती है। विभाग मे अब भी अनुशासन मौजूद है।
प्रश्न-थानेदारों के बीच आपसी तालमेल की बेहद कमी महसूस की जाती है?
जवाब-जहां चार बर्तन होते हैं, वहां टकराहट होती है, लेकिन मेरा अपना अनुभव है कि थानेदारों को अपनी ड्यूटी के चलते तालमेल बनाकर चलना पड़ता है। पुलिस बिना टीम भावना के काम नहीं कर सकती है। टीम भावना मौजूद है, जो जाहिर करती है कि थानेदारों में आपस में तालमेल मौजूद है।
सीएसपी रांझी
अनुशासन प्रिय एवं कर्मठ पुलिस अधिकारियों के रूप में पुलिस विभाग में पहचाने जाने वाले नगर पुलिस अधीक्षक रांझी जेपी मिश्रा का मानना है कि विभाग में अब भी अनुशासन मौजूद है, किन्तु उनका व्यक्तिगत अनुभव यह भी है कि नए आ रहे पुलिस वालों में पुराने पुलिस वालों की तरह वो बात नहीं है। सन् 1981 बैच के सब-इंस्पेक्टर श्री मिश्रा जबलपुर सहित छिंदवाड़ा, सिवनी, बैतूल, शहडोल, सीधी तथा भोपाल में पदस्थ रह चुके हैं। वर्तमान में सन 2013 से सीएसपी रांझी हैं।
प्रश्न-पुलिस विभाग में बल की कमी मुख्य समस्या हैं, इससे कैसे निपटा जा रहा है।
उत्तर-पिछले कुछ सालो से भर्तियां तेजी से हुई है। स्टाफ की कमी से निपटने के लिए जनभागीदारी एवं समुदायिक पुलिसिंग का सहारा लिया जा रहा है। इसके साथ ही फोर्स को अपने कार्य में दक्ष एवं निपुण बनाया जा रहा है, जिससे उनकी क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग किया जाए।
प्रश्न-क्या पहले से अधिक दक्ष पुलिस वाले नौकरी में आ रहे हैं?
जवाब-इसका जवाब मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव एवं राय से देना चाहूंगा। पहले पुलिस का प्रशिक्षण बेहद कठिन था तथा कम संसाधनों में काम करते थे, लेकिन अब वो बात नहीं है।
प्रश्न-विभाग में अनुशासनहीनता की खबरे हमेशा सुर्खियों में रहती है, क्या पुलिस में अनुशासन खत्म हो रहा है?
जवाब-पुलिस एक फोर्स है और फोर्स बिना अनुशासन के संचालित नहीं हो सकती है। विभाग मे अब भी अनुशासन मौजूद है।
प्रश्न-थानेदारों के बीच आपसी तालमेल की बेहद कमी महसूस की जाती है?
जवाब-जहां चार बर्तन होते हैं, वहां टकराहट होती है, लेकिन मेरा अपना अनुभव है कि थानेदारों को अपनी ड्यूटी के चलते तालमेल बनाकर चलना पड़ता है। पुलिस बिना टीम भावना के काम नहीं कर सकती है। टीम भावना मौजूद है, जो जाहिर करती है कि थानेदारों में आपस में तालमेल मौजूद है।
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