Friday, 5 February 2016


 हाईकोर्ट के आदेश पर जांच कर सीईओ ने की अनुशंसा
समदड़िया मॉल की लीज निरस्त की जाए
-आदेश महंगा पड़ा सीईओ को, सेवानिवृति के दो माह पूर्व ही हटाए गए सीईओ

जबलपुर।  बहुचर्चित समदड़िया  मॉल की लीज निरस्त करने की अनुशंसा जबलपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ अवध श्रोती ने कर दी है। उनको समदड़िया के खिलाफ जांच अनुशंसा देना महंगा पड़ गया। उनका रातों-रात तबादला कर दिया गया है तथा उनकी जगह प्रभार नगर निगम आयुक्त को दिए जाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जबकि उनका सेवानिवृति मार्च माह में होनी है। अमूमन सेवानिवृति के छह माह पूर्व तक किसी अधिकारी एवं कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं किया जाता है। इस आदेश  से शासन प्रशासन कटघरे में आ गए है। सूत्रों की माने तो इसको लेकर मामला फिर एक बार हाईकोर्ट में पहुंच सकता है।
ज्ञात हो कि समदड़िया मॉल की लीज आवंटन तथा उसके बाद समदड़िया मॉल निर्माण के बाद समदड़िया मॉल की दुकानों की सीधे समदड़िया द्वारा लीज दी जा रही थी तथा रजिस्ट्रियां की जा रही थीं। समदड़िया मॉल के लीज आवंटन, समदड़िया मॉल तक बिजली विभाग द्वारा  केबिल डालने, लीज से ज्यादा जमीन पर निर्माण  कार्य, प्रमोटर स्कीम के तहत मॉल बनाने के बाद उसका नाम स्वयं के नाम पर रखने तथा दुकान स्वयं किराए पर अथवा लीज पर देने संबंधी अनियमितताओं के कारण लोकायुक्त पुलिस द्वारा प्रकरण  पंजीबद्ध किया गया था।
हाई कोर्ट में याचिका हुई थी दायर
लोकायुक्त पुलिस द्वारा अजीत समदड़िया सहित  जेडीए के कई  अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे। प्रकरण पंजीबद्ध कर  लोकायुक्त ने जांच रिपोर्ट लोकायुक्त मुख्यालय आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया था, लेकिन शासन स्तर पर मामला रुका हुआ था।  इधर, आरटीआई एक्टिविस्ट सुशील कुमार मिश्रा ने एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की थी, जिसमें कहा गया था लीज शर्तों का उल्लंघन करने वाले समदड़िया मॉल के संचालक के खिलाफ लीज रद्द करने की कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने दिया फैसला
इस मामले में जेडीए ने जवाब पेश किया था कि चूंकि मामला लोकायुक्त जांच कर रही है अत: वे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है, लेकिन न्यायालय जवाब से संतुष्ट नहीं था तथा आदेश जारी करते हुए कहा  गया था लोकायुक्त आपराधिक मामले की विवेचना कर रहा हैं। सिविल नियम तथा  जेडीए अपने नियमों के अनुसार जांच कर उचित कार्रवाई दो  माह के भीतर  करे, किन्तु जांच लम्बी होने के कारण जेडीए को जांच करने में लम्बा समय लग गया।
हाल में ही जांच पूरी
जानकारी के अनुसार जांच हाल ही में पूरी करने के बाद सीईओ अवध श्रोती ने लीज शर्त का उल्लंघन तथा अन्य अनियमितताओ को सही एवं सिद्ध पाते हुए माल की लीज रद्Þद कर शासन द्वारा अधिगृहीत कर लिए जाने की अनुशंसा जेडीए अध्यक्ष को की है। सीईओ की अनुशंसा पर  जेडीए अध्यक्ष को  आदेश पारित कर न है।
अनुशंसा की कॉपी यहां भेजी
सीईओ श्रोती ने अपने अनुशंसा की रिपोर्ट पर जेडीए अध्यक्ष, प्रमुख सचिव नागरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्रालय, आयुक्त नगर निगम, एससी गांधी कार्यपालक यंत्री जेडीए, सम्पदा अधिकारी जेडीएम, अजीत समदड़िया व किशोर समदड़िया डायरेक्टर समदड़िया बिल्डर्स को प्रेषित किए है।
...वर्जन...
मैंने जांच पूरी करने के बाद लीज निरस्त करने के आदेश जारी करने वाली अनुशंसा जेडीए अध्यक्ष तथा संबंधित विभाग को प्रेषित कर दी है। प्रक्रिया के तहत जांच के आदेश का  परिपालन किया जाएगा।
अवध श्रोती, सीईओ, जेडीए  

जला पंचायत सीईओ नेहा मराव्या का दतिया तबादला


-मंत्री से न मिलना महंगा पड़ा
 जबलपुर।  अपनी तेज कार्यप्रणाली के लिए पहुंच वालों की आंखों की किरकिरी बनी रहने वाली सीईओ नेहा मराव्या का अचानक तबादला कर दिया गया। ऐसा समझा जा रहा है कि प्रभारी मंत्री गौरी शंकर बिसेन के बुलाने पर उनके पास न जाने तथा बाद में मीडिया को खुलकर  ये बयान देना कि व्यक्तिगत आमंत्रण पर वे पहुंचने के लिए बाध्य नहीं है। यही उन पर भारी पड़ गया।
 जिला पंचायत सीईओ नेहा मराव्या का तबादला दतिया कर दिया गया है।  कलेक्टर एसएन रूपला को फैक्स से इसका आदेश मिल गया है।  जानकारी के अनुसार 2011 बैच की आईएएस नेहा मराव्या सिंह का तबादला जिला पंचायत सीईओ तथा अपर कलेक्टर विकास दतिया किया गया है। इस आशय का आदेश सामान्य प्रशासन विभाग से कलेक्टर को फैक्स द्वारा भेजा गया है। विदित हो कि क्राइस्ट चर्च स्कूल की मनमानी के खिलाफ नेहा मराव्या ने कड़े निर्णय लिए थे। इसको लेकर भोपाल तक शिक्षा विभाग के आला अफसरों ने उनको समझाने कोशिश की थी, लेकिन वे मामले में  अड़ी रहीं। इतना ही नहीं जिला पंचायत के एक प्रभावशाली अधिकारी पर कार्रवाई कर उन्होंने तमाम नौकरशाहों से पंगा ले लिया था। पिछले कुछ अरसे से जिला पंचायत अध्यक्ष मनोरमा पटैल और सीईओ श्रीमती मराव्या के बीच शीतयुद्ध की स्थिति निर्मित हो गई थी। मनोरमा पटैल तथा अन्य जनप्रतिनिधि अपनी अनदेखी से काफी नाखुश थे तथा इसकी शिकायत प्रभारी मंत्री से की गई थी। वहीं मामले का पटाक्षेप करने प्रभारी मंत्री ने नेहा मराव्या को बुलाया भी था, लेकिन उन्होेंने संदेश वाहक को स्पष्ट कह दिया कि वे किसी के व्यक्तिगत रूप से बुलाने पर बाध्य नहीं हूं। विभागीय एवं शासन के स्तर पर बुलाया जाएगा तो वे आएंगी।
सूत्रों का कहना है कि नेहा मराव्या के उक्त वक्तव्य उन पर भारी पड़ गए तथा उनका तबादला दतिया कर दिया गया ।

होमगार्ड सैनिक नजर आएंगे समाज सेवक के रूप में


-संगठन के ढांचा में तेजी से बदलाव लाया जा रहा
जबलपुर। साहब के बंगलों में अर्दली का काम और पुलिस के आरक्षक का हमराह बनने वाले होमगार्ड की समाज में एक नई छवि जल्द सामने आएगी। होमगार्ड जहां लोगों को सामाज सेवक के रूप में नजर आएगा तो जांबाज जीवन रक्षक की भूमिका भी निर्वाह करेगा। होमगार्ड को जहां शासन अनेक सुविधाओं में इजाफा किया है, आरक्षक के सामान मानदेय दे रही है तो उससे उसके कार्य में बदलाव की अपेक्षा के साथ उसकी तस्वीर बदल रही है।
होमगार्ड के डीजीपी मैथिलीशरण गुप्त ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत होमगार्ड सैनिकों से काम लिया जाएगा तथा उनको इस काम के प्रति बाध्य होने के साथ  समर्पित किया जाएगा। इन सैनिकों का उच्च कोटी का प्रशिक्षण देकर इस बात का जज्बा पैदा किया जाएगा,  वे अपनी जान जोखिम में डालकर भी लोगों की जान की रक्षा करें।
मैथिलीशरण गुप्त ने बताया कि होमगार्ड समाज में जीवन संवर्द्धक, जीवन रक्षक तथा समाज सेवक की भूमिका में नजर आएगा। इसके साथ जीवन रक्षक, जीवन संवर्द्धक एवं समाज सेवा की भूमिका में सभी समाजसेवी संगठनों एवं सकारात्मक गतिविधियों में शामिल होने वाले वॉलेंटेरियों को संगठित कर उसका संचालन भी करेगा।
श्री गुप्त ने बताया कि जल्द ही एक एप लांच किया जा रहा है। इसमें प्रदेश भर में सभी समाज सेवकों को जोड़ा जाएगा। इसमें डॉक्टर, इंजीनियर, कार सेवक एवं नाव, वाहन, भवन आदि समय पर उपलब्ध कराने वाले लोग एवं संसाधनों को शामिल किया जाएगा। इस एप के माध्य में से जिनकी ओर जिसकी जहां जरूरत होगी, वहां उपस्थिति तत्काल सुनिश्चित हो जाएगी। उन्होंने बताया कि करीब 3 लाख स्वयं सेवकों को होमगार्ड से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार लोग जुड़ चुके हैं। समाज सेवकों में मीडिया के लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
समाज सेवा की दिशा
होमगार्ड सैनिकों को समाज सेवा में जोड़ने के लिए उनके द्वारा जल्द ही गांव गांव और मोहल्ले में जाकर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। स्वच्छता के लिए वे कांक्रीट वर्क करेंगे। इसके अतिरिक्त एक बड़ा बल्ड बैक भी उनके माध्यम से तैयार किया जाएगा जो जरूरतमंदों को खून उपलब्ध करा सके। इसके लिए समय समय पर रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। मलेरिया, डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के रोकथाम के लिए जागरुकता के साथ ही सक्रिय सहयोग की भूमिका चलाई जाएगी। प्रोढ़ शिक्षा, निराश्रित महिला-पुरुषों एवं ग्रामीणों को रोजगार मुखी प्रशिक्षण भी होमगार्ड सैनिक प्रदान करेगा। जहां होमगार्ड सैनिक समाज सेवक की भूमिका निर्वाह करेगा, वहीं राष्ट्र की समृद्धि के लिए भी कार्य करने जा रहा है। इसके तहत पौधरोपण, कुएं-तालाब, स्टॉप डैम आदि के निर्माण में अपनी भूमिका निर्वाह की जाएगी।
जीवन रक्षक के रूप में
जीवन रक्षक की भूमिका में होमगार्ड सैनिक नए परिवेश एवं पूर्ण दक्षता और कुशलता के रूप में उभर कर आएगा। इसी उद्देश्य से संभाग और फिर जिला स्टर पर एसडीआरएफ का गठन किया गया, जो एनडीआरएफ की तरह कुशल होगा। फिलहाल प्रत्येक संभाग मं 28 जांबाज को एसडीआरएफ में तैनात किया जाएगा। भूकम्प सहित तमाम तरह की प्राकृतिक आपदा तथा अन्य आपदा में रेस्क्यू आॅपरेशन अब पूरी दक्षता के साथ होमगार्ड जलाएगी। इसके लिए उन्हें उन्नत किस्म का प्रशिक्षण दिया जाएगा, उनके पास गैंती-फावड़ा और रस्सा जैसे संसाधन भर नहीं रहेंगे, वरन् अत्याधुनिक ड्रिल मशीनें, कटर सहित तमाम तमाम संसाधन मौजूद होंगे, जो डेजास्टर टीम के पास होने चाहिए। इसके साथी ये तेज गति से अपने काम अंजाम देने में सक्षम होंगे। इसके लिए समूचे ढांचा में बदलाव लाया जा रहा है।
...वर्जन...
डीजीपी के निर्देश पर होमगार्ड संगठन में बदलाव लाने तथा होमगार्ड सैनिकों को नई भूमिका में लाने कार्य शुरू कर दिए गए है।  हम प्रति सप्ताह बचाव संबंधी कार्यशाला का आयोजन कर रहे है। रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। होमगार्ड सैनिकों के साथ करीब 3 हजार वॉलेंटियर यानी गैर शासकीय संगठन के लोगों को जोड़ लिया गया है।
राजेश जैन
डिस्ट्रिक कमांडेंट, जबलपुर

...वर्जन-2...
बहुत जल्द ही होमगार्ड सैनिक की भूमिका समाज में बदली नजर आएगी। उनके लिए सन् 1947 में बने अधिनियम में भी संशोधन कराया जा रहा। प्रस्ताव शासन के पास है। युद्ध स्तर पर ढांचे की कार्यप्रणाली में बदलाव के काम शुरू कर दिए गए हैं।
मैथिलीशरण गुप्त, डीजीपी होमगार्ड

मंडला की बाला दिल्ली में 25 हजार में बिकी

 मंडला की बाला दिल्ली में 25 हजार में बिकी
 गैर सरकारी संगठन एनसीआईबी
  के प्रयास से चुंगुल से मुक्त हुई
जबलपुर। मंडला की एक बाला को दिल्ली में काम दिलाने का झांसा देकर उसका दिल्ली में 25 हजार रूपए में बेच दिया गया। आदिवासी बाला को दिल्ली बेचे जाने के खबर पर  गैर शासकीय संगठन नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने सक्रियता दिखाई तथा डीजीपी तक से पत्र व्यवहार किया गया। पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते युवती को अपहरणकर्ताओं ने अपने चंगुल से मुक्त कर दिया है लेकिन इस बाला के अपहरण के मामले में अब तक किसी को नहंी पकड़ा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला से  थाना  मवई की युवती को आरोपी धर्मेन्द्र मरावी पिता सुक्खू मरावी निवासी टोकर टोला चंदवारा रैयत थाना बिछिया करीब एक वर्ष पूर्व काम दिलाने का लालच देकर दिल्ली ले गया। लंबे समय तक युवती के वापस ना आने व परिजनो से संपर्क नहीं होने पर युवती के पिता ने मवई थाना में शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं युवती के पिता ने एनसीआईबी के स्टेट इंचार्ज विदीप सिंह मरकाम को अपनी पुत्री के दिल्ली में फंसे होने की जानकारी दी थी।

डीजीपी को लिखा गया पत्र
एनसीआईबी के  टेट इंचार्ज द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मंडला जिले से किशोरी और युवतियों की तस्करी के संबंध में अवगत कराया। मंडला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओंकार सिंह कलेश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मवई पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिये। इस पर मवई पुलिस ने जांच तेज की। इस बीच स्टेट इंचार्ज पुलिस अधिकारियो व परिजनो के लगातार संपर्क में बने रहे।
पुलिस ने आरोपी युवक के घर दबिश दी लेकिन युवक पुलिस के हाथ नहीं लगा। एनसीआईबी स्टेट इंचार्ज विदीप सिंह मरकाम ने पुलिस अधिकारियो से इस मामले की तह  तक जाने की मांग की। पुलिस के सामने रखा गया कि जिले में मानव तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे है।
 एनसीआईबी तथा पुलिस के सक्रिय होने पर आरोपी युवक ने दिल्ली में अपने एजेंट का तत्काल युवती को छोड़ने के लिए कहा । इसके बाद युवती को मंडला भेज दिया गया।
अपराध दर्ज किया
 पुलिस द्वारा युवती के बयान दर्ज करने के साथ आरोपी युवक की पतासाजी कर पूछताछ की जा रही है। इस क्षेत्र से दिल्ली व अन्य महानगर तक पहुंचाई गई अन्य युवती, किशोरियो के संबंध मे जानकारी सामने आ सकेगी। एक पुलिस दल दिल्ली भी भेजा गया जों वहां मानव तस्करी में लिप्त एजेंट को पकड़ने प्रयास कर रही है। युवती ने पूछताछ में बताया कि दिल्ली में एक महिला के पास 25 हजार रूपए में बेच दिया गया था।
वर्जन
युवती को दिल्ली में बेचे जाने के मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है।
एपी सिंह
पुलिसअधीक्षक मंडला 

सहस्त्र दल कमल बचाने टूट पड़ा पूरा गांव


* मझौली के विष्णु सरोवर को साफ करने चल रहा काम, नगर सुख समृद्धि से जुड़ा है कमल


जबलपुर।  दुर्लभ हजार दल के कमल को बचाने के लिए मझौली के नागरिकों ने  तालाब को बचाने एक अभियान चलाया है। इस तालाब में जो कमल पाए जाते हैं, वह आसपास के किसी इलाके में नहीं पाए जाते है। किवदंतियों के मुताबिक यहां सहस्त्र दल के कमल खिलते हैं, जो भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। मझौली स्थित विष्णु सरोवर  पुराना नाम नरिया तालाब की सफाई के लिए क्षेत्रीय लोग पिछले 7 दिनों से सघन अभियान चला रहे हैं।
सहस्त्र दल को लेकर किवदंतियां एवं पौराणिक मान्यता है कि जिस तालाब और सरोवर में सहस्त्र दल कमल खिलते है, वहां देव लोक से देवता तथा गंधर्व आदि स्नान करने आते हैं। कहा जाता है कि सुदूर हिमालय स्थित मानसरोवर में सहस्त्र दल कमल पाया जाता है और वही कमल मझौली के इस तालाब में पाए जाते है।
विष्णु बाराह मंदिर में होते हैं अर्पित
यह सच है कि विष्णु सरोवर में वर्षों से प्रतिवर्ष विलक्षण कमल खिलते हैं। इनके दल  भी सामान्य कमल से कई गुना अधिक होते  है। क्षेत्रीय लोगों का दावा है कि यहां के कमल में एक हजार पंखुडी यानी दल होते है।  कहा जाता है कि जैसे कमल इस तालाब में खिलते हैं, वैसे कमल प्रदेश के अन्य किसी सरोवर अथवा तालाब में नहीं मिलते। पुराने बुर्जगों का कहना है कि गर्मियों में ये कमल खिलते है तथा  विष्णु वाराह मंदिर में अर्पित होते हैं। अमूमन सामान्य  कमल बारिश के बाद खिलते है।
आधे से ज्यादा हो चुकी है सफाई
विष्णु सरोवर के कमल के पौधों की रक्षा के लिए विश्व हिन्दु परिषद के मदन साहू तथा त्यागी आश्रम के  नव युवक मंडल के नेतृत्व में सफाई अभियान चल रहा है। पिछले 7  दिनों से क्षेत्र के महिला-पुरूष तथा बच्चे तक तालाब में उतर आए हैं और भरी ठंड में घंटों पानी में रहकर तालाब की चोई हटाने के काम मे जुटे हैं।  तालाब की आधे से अधिक चोई हटा ली गई है।
क्या कहते हैं जानकार
वैज्ञानिकों की मानें तो अमूमन अच्छी प्रजाति के कमल में पचास से अधिक दल तक पाए जाते है। इससे अधिक दल वाले कमल को अमूमन लोग सहस्त्र दल का कमल बोल देते हैं। मझौली तालाब में अधिक दल के कमल पाए जाने की खबर मिलती रही है।

वर्जन -2
म्यूटन का परिणाम
सैकड़ो-हजारों साल में कभी कभार जैनेटिक परिवर्तन जीव जन्तु एवं प्लांट में होते हैं। इस परिवर्तन के दौरान अपनी सामान्य प्रकृति से हट कर उत्पत्ति होती है जिसे म्यूटन कहा जाता है। कमल के सरोवर में  म्यूटन के प्रभाव से सामान्य से कई गुना अधिक दल वाले कमल हो जाते हैं, जो दुर्लभ होते हैं। कुछ पीढ़ी बाद वे विलुप्त भी होने लगते हैं। इस तरह के कमल को ही सहस्त्र दल कमल कहते हैं।
डॉ. किनजिलक सिंह
कृषि  वैज्ञानिक

वर्जन-3
पिछले कई दिनों से स्थानीय नागरिकों द्वारा तालाब के सफाई के लिए अभियान
 चलाया जा रहा है। हमारे यहां 1000 पंखुड़ी वाला कमल  खिलते  है। इस अभियान में तालाब के बाजू से स्थित आदिवासी बस्ती के लोगों का जमकर सहयोग मिल रहा है। यह तालाब भगवान बाराह की जन्म स्थली है।
बाक्स
देश में दुर्लभ कल्चुरी कालीन विष्णु बाराह की दुर्लभ प्रतिमा मझौली में स्थित है। विष्णु बाराह का यह दुर्लभ एवं एतिहासिक मंदिर यहां स्थित है, जो सरोवर से कुछ फासले पर है। किवदंतियां हैं कि मछुआरों को  जाल में भगवान विष्णु बाराह की मूर्ति मिली थी, जिसको मंदिर में स्थापित किया गया था लेकिन मूर्ति प्रतिदिन बढ़ती चली गई, अंतत: इसको कीलित किया गया। जिसके बाद इसका बढ़ना रूका है। अब भी देश भर से लोग यहां विष्णु बाराह के दर्शन करने आते है।

एमपी का गिद्ध एटलस होगा तैयार


* गणना से आशांन्वित वन अमला
* जीपीएस सिस्टम से गिद्धों के ठिकाने चिन्हित  हुए

जबलपुर। प्रदेश में गिद्धों के पहले चरण की गणना से वन अमला बेहद आशान्वित है। दरअसल अनुमान से अधिक गिद्ध गणना में टीम को मिले है, इसके साथ ही गिद्धों के ठिकाने खोजने में अमला कामयाब हुआ है। इन ठिकानों को जीपीएस सिस्टम से पहचाना गया है और अब गिद्ध के ठिकानें के जो नक्शे तैयार हुए है, उसका एटलस तैयार करने का काम शुरू किया जा रहा है।
गणना के दौरान  बड़ी संख्या में प्रवासी गिद्ध भी मिले है। दरअसल उनका वास्तविक ठिकाना मध्य प्रदेश में न होकर प्रदेश के बाहर है। उल्लेखनीय है कि ं अब तक गिद्धों के ठिकाने का कोई रिकार्ड वन अमले के पास नहंी था लेकिन इस गणना से नक्शा काफी स्पष्ट होने लगा है।  मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली गिद्धों की प्रजाति के ठिकाने तो खोजे गए है, इसके अतिरिक्त बाहर के  प्रदेश से आने वाले गिद्धों के यहां मौजूद उपनिवेश भी खोजे गए  है। इन सब को जल्द ही  एटलस में उतारा जाना  है।
घोंसलों का होगा उल्लेख
इस गिद्ध एटलस में बकायदा जीपीएस सिस्टम के तहत गिद्धों के मौजूदगी की वास्तविक ठिकानों का उल्लेख किया जाएगा। गिद्ध  के नक्शे में उनके  घोसले के साथ वे कहां कहां पाए जाते है, इसको दर्शाया जाएगा। इस गिद्ध एटलस के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी कि गिद्ध के संरक्षण के लिए क्या किया जाए।
67 गिद्ध पाए गए
जानकारी के अनुसार  प्रदेश भर में 876 स्थानों में गिद्धों के ठिकाने चिंहाकिंत किए गए है।  प्रदेश मे पहली चरण की गणना  में  लगभग 67 सौ गिद्ध पाए गए  है। गिद्ध गणना में मैपिंग में जिन स्थानों में सर्वाधिक गिद्ध पाए गए है, वहां संरक्षण के लिए शासन की बड़ी योजना प्रारंभ करने जा रहा है। इसमें  श्योरपुर, मंदसौर,  रायसेन, भोपाल, तथा दमोह जिले को प्रमुखता में रखे जाने की संभावना है।
की जा रही समीक्षा
गिद्धों के पहले चरण की गणना के बाद इसकी समीक्षा का दौर शुरू कर दिया  गया। इसमें खासतौर पर अनेक स्थानों में  दुर्गम क्षेत्रों में पाए जाने वाले प्रवासी गिद्ध भी देखे गए है। इसके बावजूद अनेक स्थानों में  अपेक्षा से कम गिद्ध भी मिले है। जिसको लेकर उनके प्रवास पर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।  वन विभाग  गिद्ध गणना की नोडल एजेंसी भारतीय वन प्रबंधन संस्था भोपाल के माध्यम से मई माह में गिद्धों के दूसरे चरण की गिनती शुरू करने वाला है। इस दौरान जो क्षेत्र गणना से छूट गए हैं, वहां गणना की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिन जिलों में गणना हो चुकी है , वहां गणना की पुष्टि के लिए फिर से गणना की जानी है।
वर्जन
गिद्धों की गणना में पहली बार प्रदेश में मौजूद गिद्धों की वास्तविक संख्या आई है। जल्द ही एक  एटलस तैयार किया जा रहा है जहां गिद्धों के प्रवास सहित अन्य तरह की जानकारी मौजूद होगी।  इन इलाको को संरक्षित करने भी योजना बनाई जाएगी।
आरके श्रीवास्तव
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

प्रदेश में गली- गली मिल रहा मौत का सामान


प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले स ेबिक रहीं नींद की गोलियां
  सवा सौ लोगों ने की  साल भर में खुदकुशी


जबलपुर। मध्य प्रदेश में आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक हालत पर  पहुंचते जा रहे है। औसतन प्रतिदिन दो दर्जन लोग आत्म हत्या कर रहे है। मध्य प्रदेश में पौने चार हजार लोगों ने आत्महत्या की है। नेशनल क्राइम ब्यूरों के आंकड़ो के मुताबिक सर्वाधिक मौते इम्पुल इंजैक्शन के सेवन के कारण हुई है। इस मौतों में केवल ढाई हजार मौत का कारण इम्पुल रहा है। इसके साथ ही नींद की गोली खाकर करीब सवा सौ लोग खुदकुशी कर चुके है।
 मध्य प्रदेश में तेजी से आत्महत्याओं का ग्राफ बढ़ा है। इन आत्महत्या के तरीकों पर गौर किया जाए तो लोगों ने सबसे सरल तरीका जहर पीकर खुदकुशी  करना लगता है।  जानकारी के अनुसार इम्पुल सहित अन्य कीटनाशक पीकर ढाई हजार से अधिक लोगों ने मध्य प्रदेश में खुदकुशी है। इसके अतिरिक्त फांसी लगाकर, ट्रेन से कटकर तथा नदी व कुए में कूद कर जान देने की घटानाएं जहर सेवन से आधी है। जहर सेवन के मामले में नींद की गोली खाकर करीब सवा सौ आत्महत्या वर्ष 2014-15 में की गई है। यह संख्या भी बेहद अधिक समझी जा रही है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले साल राष्ट्रीय की तुलना में शहरों में आत्महत्या की दर ज्यादा थी। जहां मध्यप्रदेश में जबलपुर आत्महत्या  के मामलों में शीर्ष पर हुआ करता था अब उसकी जगह भोपाल ने ली है। यहां 1 हजार 64 लोगों ने बीते साल खुदकुशी की। शहरी क्षेत्र में आत्महत्या की दर 12.8 प्रतिशत आंकी गई है।
बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं
बताया गया कि कम्पोज तथा ट्राइका जैसी दवाइयां लगभग बैन कर दी गई है। इसके बावजूद ट्राइका सहित अन्य नींद की दवाइयां प्रदेश भर में मेडिकल स्टोर्स में डॉक्टर पर्चे और बिना पर्चे के आसानी से मिल रही है।
दस से अधिक गोलीनहीं मिलेगी
नियम है कि नींद की तथा नशे से संबंधित गोलियां दस से अधिक डॉक्टर के पर्चे में भी नहंी मिलती है। एक बार कोई पर्चा लिखवाने के बाद चाहे तो अलग अलग मेडिकल स्टोर्स से ये दवाइयां खरीद लेता है। दस की जगह सैकड़ा भी गोली आसानी से खरीद सकता है। इन दवाइयों की बिक्री का कोई रिकार्ड नहंी रखा जा रहा है। जानकारों की माने तो नींद की गोली की पर्चा से दवाई देने के बाद मेडिकल स्टोर्स संचालक को गोली देने की जानकारी पर्चे में दर्ज करनी चाहिए जिससे वह इसी पर्चे से दूसरी जगह गोलियां न खरीद  सके।
पचास से अधिक जरूरी
जानकारों की माने तो नींद की गोली खाकर आत्महत्या करने वाले व्यक्ति को 40-50 गोली खानी पड़ती है तभी उसकी मौत होती है। प्रदेश में करीब सवा सौ लोगों ने नींद की गोला खाकर आत्महत्या की है जिससे जाहिर है कि नींद की गोली मिलना आसान काम है।
इम्पुल प्रतिबंधित
इसी तरह बढ़ती आत्महत्या की  घटनाओं के मद्देनजर सल्फास की पूरी तरह खुली बिक्री प्रतिबंधित है। इसके बावजूद किसी भी किराना स्टोर्स में बिना रोकटोक के चूहा मार दवाई के नाम पर सल्फास मिल जाता है। सर्वाधिक आत्महत्या की घटनाएं इम्पुल इंजैक्शन फोड़ कर पीने से हुई है। इम्पुल इंजेक्शन किसी भी कृषि दुकान में बेहद आसानी से मिलता है। नियम यह है कि इम्पुल इंजेक्शन किसानों को हीउपलब्ध कराया जाता है, वह भी ऋण पुस्तिका में इसका उल्लेख करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
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जबलपुर से आगे निकला भोपाल
बीते तीन सालों से जबलपुर पुलिस बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को रोकने संजीवनी अभियान चला रही है। दरअसल नेशनल क्राइम रिकार्ड  ब्यूरों  की वर्ष  2012 की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि जनसंख्या की तुलना करने पर  आत्महत्या क दर जबलपुर में देश में नम्वर  टू  पर है।  2012 में जबलपुर में 1572 आत्महत्याएं हुई थीं ये  45.1 फीसदी था।  इसके बाद आॅपरेशन संजीवनी चलाकर आत्महत्या रोकने प्रयास किए गए। अब जबलपुर में आत्महत्या की दर मे मामूली कमी आई है, जबकि भोपाल उपर आ रहा  है।
बाक्स
बाक्स
नशीली दवाई बिक्री के मामले में लोक सभा ने सांसद राकेश सिंह ने प्रश्न भी उठाया था जिस पर लोक सभा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक अवैध  तरीके से नशे की दवाई  बेंचने के मामले में प्रदेश में एक भी मेडिकल स्टोर्स के लायसेंस निलंबित नहीं किए है।
आत्महत्या  के  मामले में शीर्ष शहर

चेन्नई 2,214
बेंगलुरु 1,906
दिल्ली 1,847
मुंबई 1,196
भोपाल 1,064


वर्जन
मेडिकल स्टोर्स वालों को समय समय पर डॉक्टर की पर्ची के बिना नींद की तथा अन्य प्रतिबंधित दवाइयां न देने चेतावनी दी जाती है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जा रही है।
एमएम अग्रवाल
सीएमएचओ जबलपुर
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प्रदेश में पहली बार टाइगरों की गिनती कर रहा वन अमला



 नेशनल पार्क एवं  अभ्यारण्य मेंं गिनती शुरू
 
 पांच हजार से अधिक कर्मचारी जुटे
जबलपुर। मध्य प्रदेश में पहली बार वन्य प्राणियों की गिनती प्रदेश के 52 वन मंडलों एवं नेशनल पार्क के वन्य कर्मियोंं द्वारा की जा रही है। सभी नेशनल पार्क  में 31 जनवरी से गिनती शुरू कर दी गई है जो 5 फरवरी तक चलेगी।
वन विभाग द्वारा कान्हा, पेंच, बांधवगढ, पन्ना, संजय गांधी, सतपुड़ा, भोपाल स्थित वन विहार, सहित 11 नेशनल पार्क एवं अम्यारण्य में गिनती  प्रारंभ की गई है जिसमें 5 हजार से अधिक कर्मचारी रखे गए है।
मालूम हो कि इसके पूर्व टाइगरों तथा वन्य प्राणियों की गणना वन्य प्राणी अनुसंधान संस्थान देहरादून द्वारा किया जाता रहा है। प्रदेश में करीब 28 हजार वन्य कर्मियों का भारी भरकम अमला मौजूद है। इसके बावजूद गिनती के लिए बाहर की एजेंसी को बुलवाना पड़ता था। शासन ने इस वर्ष से स्वयं के संसाधनों से गिनती करने का निर्णय लिया। जबलपुर स्थित राज्य वन अनुसंधान केन्द्र को नोडल एजेंसी बनाया गया है। नेशनल पार्क में शाकाहारी एवं मांसाहारी जीव की गणना होकर डाटा यहां पहुंचेगे। इसके बाद दूसरे चरण में 10 फरवरी के बाद वन मंडलों में वन्य प्राणियों की गिनतीहोनी है।
नेशनल पार्क में वन्य प्राणियों की गणना के कार्य के चलते जहां ट्रांजिस्ट लाइन खींच कर वहां कैमरे आदि लगाए  गए है। वहीं वन्य प्राणियों की गिनती के लिए वन कर्मियों के दस्ते नेशनल पार्क एरिया तथा कोर एरिया में घुस रहे है। इसके साथ ही बफर जोन में भी गिनती की जा रही है।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में सर्वाधिक बाघ कान्हा नेशनल पार्क में है जबकि बांधवगढ़ तथा पन्ना नेशनल पार्क में बाघों का घनत्व बेहद अधिक है। पेंच में बड़ी संख्या मे बाघ ,तेन्दुआ और अन्य शाकाहारी जीव चीतल , सांभर, हिरण, भालू तथा अन्य वन्य जीव पाए जाते है। सतपुड़ा नेशनल पार्क में काले हिरणों की संख्या काफी है। वन्य प्राणियों की गणना सैम्पलिंग प्रणाली से की जाना है जिसके तहत वन्य प्राणियों को भौतिक रूप से देखा जाएगा। इसके अतिरिक्त उनके शरीर में मौजूद चिंह, जानवरों के पग मार्क आदि के सैम्पल दर्ज किए जाएंगे।
जबलपुर में हुआ प्रशिक्षण
वन्य प्राणियों की गणना के लिए राज्य वन अनुसंधान केन्द्र में विभिन्न चरण में वन्य प्राणियों की गणना के लिए देहरादून से आए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण भी प ्रदान किया जा चुका है। अब देखना यह है कि वन अमले द्वारा की जाने वाली गणना कितनी सटीक होती है।
टाइगर गणना रही है विवाद में
देश में टाइगरों की गणना हमेश विवाद में रही है। जहां एक तरफ टाइगरों की संख्या कई राज्यों में अनावश्यक बढ़ाए जाने के आरोप है यहां तक एनीमेशन से फर्जी वीडियो तैयार करने तक का आरोप लगा है। इसी के चलते मध्य प्रदेश से टाइगर स्टेट होने का दर्जा भी छिन चुका है। अब नई गणना में कितने टाइगर एवं तेन्दुए आते है यह सामने आएंगे।
सर्वाधिक तेन्दुए मौजूद
मध्य प्रदेश के जंगल में सर्वाधिक तेन्दुए पाए  गए है। इसके पूर्व हुई गणना में इनकी संख्या 4 हजार से उपर थी। लेकिन जानकारों का कहना है कि तेन्दुआ छिप कर रहने वाला प्राणी है जिसके कारण तेन्दुए की गणना बेहद कठिन और जटिल काम है।  यदि सही तरीके से गणना होती है तो प्रदेश में तेन्दुए की संख्या 5 हजार के करीब पहुंच सकती है।

ऐसे होनी है गणना
बताया गया  कि पहले तीन दिन मांसाहारी जीवों यानी तेन्दुआ और टाइगर की गणना होगी। इस दोरान अन्य मांसाहारी जीव मिलते है तो उनकी  भी गणना होगी। वहीं अंतिम तीन दिन शाकाहारी जीवों की गणना होगी। जंगल में शाम जल्द हो जाती है इसके मद्देनजर गणना े दोपहर 2 बजे के बाद बंद कर दी गई।

वर्जन
सभी पार्को में गणना प्रारंभ कर दी गई है। गणना के कार्य के बाद गणना की समीक्षा की जाएगी।
सीएच मुरली कृष्ण
डायरेक्टर राज्य वन अनुसंधान केन्द्र 

नाक से निकाले सौ से अधिक कीड़े



  जागरूकता के अभाव के कारण बढ़ती है बीमारी
दीपक परोहा
9424514521

आज से करीब 15 साल पहले जब मै नरसिंहपुर जिले में देवरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ था तब 16 वर्षीय लड़की अनीता बाई इलाज के लिए अस्पताल पहुंची। उसको कई महीनों से लगातार सर्दी बनी हुई थी तथा नाक से खून बहने लगा था तथा मवाद भी आ रही थी। चैकअप करने पर पता चला कि उसके साइनस में कीड़े भर चुके थे। यही कीडेÞ बाद में दिमाग तक पहुंच सकते थे जो उसकी मौत का कारण बन जाते।
  विक्टोरिया अस्पताल जबलपुर में पदस्थ नाक-कान- गला रोग विशेषज्ञ डॉ.के सी गुप्ता जब देवरी में पदस्थ थे तब उन्होंने इस ग्रामीण बाला का इलाज किया तथा उसकी जान बचाई। डॉ श्री गुप्ता ने बताया कि लड़की की नाक में दवा डालने के बाद कीड़ों को बेहोश किया गया तथा कुछ कीडेÞ दवा से मर भी गए थे। इसके बाद तालू के नीचे से मुंह के रास्ते से एक- एक कर कीड़े निकाले गए। करीब सौ से अधिक कीड़े उसके नाक से निकाले गए।  जानलेवा सर्दी से उसका जान बच गई।
लगातार सर्दी खतरनाक
डॉक्टर गुप्ता का कहना है कि लगातार सर्दी बनी रहना ठीक नहीं है। आमतौर पर लोग  सर्दी होने पर बीमारी का इलाज नहंीं कराते है तथा घरेलू नस्खे से ही बीमारी ठीक करने का प्रयास करते है। सर्दी खतरनाक हो जाती है। सर्दी के कारण बैैक्टेरियल इंफैक्शन नाक नलिका के साथ कान में भी इंफैक्शन का कारण बन जाते है।
कान में मैगॉट्स
डॉक्टर गुप्ता का कहना है कि कान में भी फंगस एवं बैक्टीरियल इंफैक्शन अक्सर हो जाता है लेकिन इसका इलाज नहीं कराया जाता है जिससे पर्दे में छेद हो जाता है तथा बहरापन का कारण बन जाता है। उन्होंने बताया कि कान में इंफैक्शन के दौरान कीड़े पड़ने लगते है जिन्हें मैगॉट्स कहते है। ये सफेद रंग के छोटे-छोटे कीड़े व्यक्ति की कान का मांस खाकर जिंदा रहते है, ये कीड़े दिमाग में पहुंच जाए तो मरीज की मौत हो जाती है। कान में कीड़े पड़ने के 25 से ज्यादा मामले विक्टोरिया अस्पताल में उनके सामने आए जिसका इलाज किया गया, और लगभग सभी मरीज ठीक हुए है। उन्होंने कहा कि ज्यादा दिन कान या नाक में घाव बने रहने से उनमें कीड़े पड़ जाते है।
क्यों होता है काम में इंफैक्शन
आखिर कान में बच्चों एवं बड़ों को क्यों इंफैक्शन होता है? इस संबंध में उनका कहना है कि जागरूकता का अभाव ही इसका मुख्य कारण है। कान से मैल निकालने की लोगो की आदत होती है। इस मैल को निकालते वक्त दूषित काड़ी का उपयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए। नमी युक्त वातावरण में कई बार मामूली इंफैक्शन तथा कान दर्द की शिकायत होना आम बात होती है। ऐसे में लोग बच्चों के काम में कच्चा दूध अथवा  तेल डालते है। यहीं दूध और तेल बाद में रोग का कारण बन जाता है। उन्होंने बताया कि नहाते वक्त कान में गंदा पानी जाने से इंफैक्शन एवं दर्द की शिकायत होती है तथा मामूली दर्द का घरेलू उपचार बड़ी बीमारी का कारण बनता है। कान को बचाकर रखना बेहद जरूरी होता है। 

पहले प्रेम, शादी और फिर 1 लाख में सौदा

पहले प्रेम, शादी और  फिर 1 लाख में सौदा
हरियाणा में 1 लाख में बेची गई सिवनी की युवती

सिवनी के कुरई थाना क्षेत्र में फिर सामने आया मानव तस्करी का मामला

3 आरोपी जेल भेज गए

जबलपुर। पहले झांसा फिर प्यार, उसके बाद शादी और एक बच्चा होने पर जब मन भर गया तो पत्नी को हरियाणा में एक लाख रुपए में बेच दिया। पीड़ित युवती को करीब 4 माह तक बंधक की तरह रखा गया। किसी तरह हरियाणा से भाग कर आई युवती ने कथित प्रेमी से पति बने आरोपी की बेवफाई और अपने हुए अत्याचार की रिपोर्ट पड़ोसी जिला सिवनी के कुरई थाना में दर्ज कराई। पुलिस ने मानव तस्करी तथा बंधक बनाए जाने का प्रकरण दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जबलपुर सहित आसपास के जिले मंडला, डिंडौरी, बालाघाट तथा सिवनी में लगातार मानव तस्करी के मामले सामने आ रहे है। मध्य  प्रदेश और महाराष्ट्र के सीमवर्ती कुरई थाने के ग्राम  ग्राम जुनारखेड़ा की 23 वर्षीय अनिता (काल्पनिक नाम) की जान पहचान पड़ोसी गांव के थांवरजोड़ी निवासी अर्जुन गौंड से हुई।
पहले से शादीशुदा था
अर्जुन गौड़ के प्रति अनिता आकर्षित हुई। यह मालूम होने के बावजूद कि अनुर्जन गौंड शादी शुदा है, वह उसके प्रेम जाल में उलझ कर रह गई। प्रेमी ने अनिता का दैहिक शोषण करने लगा। वह गर्भवती हो गई लेकिन इसके बावजूद उसने उससे विवाह नहीं किया। गांव वालों के दबाव और समाज के भयवश अर्जन ने अनिता को पत्नी की तरह बिन ब्याह के रखा  लिया। कुछ माह पहले अनीता ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म बाद करीब 3 महिला अर्जन के पास अनीता रही। इस बीच वह अनीता से छुटकारा पाने की जुगत में लग गया।
मुकेश से किया सौदा
कुछ  माह पूर्व अुर्जन की हरियाणा निवासी मुकेश अग्रवाल से उसकी कुरई में मुलाकात हुई। मुकेश की पत्नी की मौत हो चुकी थी तथा उसकी दूसरी शादी नहीं हो रही थी तथा वह किसी ऐसी युवती की तलाश में था जो उसके बच्चों की देखरेख करे तथा वह उसे दासता पत्नी की तरह रख सके। इसके लिए वह रकम खर्च करने तैयार था। अर्जुन ने उसे अपनी दासता पत्नी अनीता को दिखाया। अर्जुन की मां भी अपनी अनचाही बहु से छुटकारा पाना चाहती थी। अर्जुन तथा उसकी मां लछमनिया बाई उम्र 52 वर्ष ने अनीता को 1 लाख रूपए में बेचने का इरादा कर लिया और मुकेश अग्रवाल निवासी महेन्द्र से 1 लाख रूपए ले लिए।
घुमाने के बहाने ले गया

करीब  4 माह पहले अर्जुन अनीता तथा उसकी बच्ची को घुमाने के बहाने महेन्द्रगढ़ हरियाणा ले गया जहां पीड़िता को घुमाने के बहाने बच्ची समेत हरियाणा ले गया। यहां उसने  महेन्द्रगढ़ निवासी मुकेश अग्रवाल के घर अनीता और उसकी बच्ची का ेछेड़ कर भाग आया। यहां महेन्द्र अनीता से रात दिन मेहनत मजदूरी कराने लगा। घर का पूरा काम काज वह देखती थी। उससे खेत में भी काम कराया जाता था जबकि रात्रि में मुके श अनीता का अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। जी-तोड़ मेहनत और दैहिक शोषण से परेशान अनीता किसी तरह अपनी बच्ची को लेकर वहां से भागने में कामयाब हुई  और यहा कुरई थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

वर्जन
पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट पर अर्जुन, अर्जुन की मां तथा  मुकेश अग्रवाला के खिलाफ मानव तस्करी के तहत भादंवि की धारा 470,471, 344, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
शिवराज सिंह
टीआई, कुरई, जिला सिवनी


राजस्थान में बिकी थी युवती
सिवनी जिले के ही हुगली थाना क्षेत्र की एक युवती को चार माह पहले राजस्थान में बेचा गया था। इस युवती के बचकर आने के बाद मामले का खुलासा हुआ। उल्लेखनीय है कि सिवनी सहित जबलपुर जिले की युवतियों को राजस्थान, हरियाणा, छतरपुर तथा बांदकपुर में बेचे जाने की अनेक घटनाएं हो चुकी है। उक्त क्षेत्र में यहां भगाकर ले जाए जाने वाली युवतियां बिक रही है। अब तक दर्जनों युवतियों के गायब होने का कोई सुराग नहीं मिला है।
हाल ही में मंडला में हुई घटना
हाल ही में एक युवती को दिल्ली में बेचे जाने की घटना हुई। एक एनजीओं के प्रयास से युवती मंडला वापस लौट कर आई । मंडला में बीते एक साल में मानवतस्करी से जुडे 8 मामले प्रकाश में आ चुके है। इसी तरह बालाघाट में करीब 70 अपहरण के मामले है जिसमें  से कुछ मामलों में मानवतस्करी का मामला भी दर्ज किया गया है। उक्त क्षेत्रों से दक्षिण भारत तथा उत्तर भारत में बेरोजगार किशोर एवं बालाओं को काम धंधा दिलानें का झांसा देकर उन्हें बेचने वाले कई गिरोह सक्रिय है। 

Wednesday, 6 January 2016

100 करोड़ से अधिक की हुई लकड़ी चोरी


-फर्जी टीपी मामले में खुल रहे नित नए राज
-राजस्व विभाग के अधिकारियों की साठगांठ में भी हुई जंगल कटाई
-अब तक वन विभाग के 8 अधिकारी-कर्मचारियों सहित 18 गिरफ्तार
जबलपुर। बालाघाट में मात्र दो साल के दौरान वन विभाग के अमले, राजनेता, टिम्बर व्यापारियों और राजस्व अमले की साठगांठ में 100 करोड़ से अधिक की लकड़ी चोरी की गई। फर्जी टीपी की जांच के वन माफिया के किए गए फर्जीवाड़े और वन के कत्लेआम के मामले लगातार परत-दर-परत खुलते जा रहे हैं। इस मामले में आरोपियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। बालाघाट पुलिस ने टीपी घोटाले में मामले में दो आरोपियों को और पकड़ा है, जिसमें पकड़े गए आरोपियों की संख्या 18 पर पहुंच गई है। इसमें एक रेंजर, दो डिप्टी रेंजर तथा 5 कर्मी गिरफ्तार हो चुके है, जो फिलहाल जेल में है।
पुलिस अधीक्षक बालाघाट गौरव तिवारी ने बताया कि इस प्रकरण में अब 23 आरोपी नामजद हो गए हैं। दो रेंजर तथा एक टिम्बर व्यापारी की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। उनके पकडेÞ जाने पर वनोपज चोरी के मामले में और नए रहस्य खुल सकते हैं।
चोरी की लकड़ी के लिए
पुलिस ने इस मामले के लिए विशेष जांच दल गठित किया है, जिसने सैकड़ों की संख्या में जहां टीपी जब्त की थी। वहीं छत्तीसगढ़ में जगदलपुर से चोरी की लकड़ी खरीद कर खुर्दबुर्द करने वाले एक बड़े व्यापारी को पकड़ा था। उसके बाद से लगातार आरोपियों के पकड़े जाने का सिलसिला अब तक जारी है।
25 मामले जंगल कटाई के
वन माफिया इस टीपी माध्यम से जंगल से काटे गए हरे-भरे पेड़ों की तस्करी करते रहे हैं और वन अमला मूकदर्शक बनकर उसमें हिस्सेदारी करता रहा है। बीते 18 महीने के दरमियान 5000 पेड़ों की कटाई का नया मामला सामने आया है। इसमें पुलिस ने 25 प्रकरण दर्ज कर चुकी है। इस मामले की जांच भी प्रारंभ कर दी गई है।
पुलिस कार्रवाई से हड़कंप
टीपी घोटाले के साथ वनोपज चोरी का मामला अब वन कटाई के मामले में तब्दील होने से वन विभाग के साथ राजस्व विभाग में भी हड़कंप मच गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वन माफिया ने सिर्फ वन क्षेत्र ही के जंगल नहीं, बल्कि राजस्व क्षेत्र के जंगलों में भी धड़ल्ले से पेड़ काटे हैं। इस तरह मात्र दो साल के अंतराल में 100 करोड़ से अधिक के पेड़ कटे हैं।
ये सिलसिला 4 साल चला
सूत्रों का कहना है कि पुलिस के पास मात्र दो साल तक पेड़ काटे जाने के सबूत एवं जानकारी हाथ लगी है, जबकि वन विभाग एवं राजस्व विभाग की साठगांठ से अवैध कारोबार चार साल तक लगातार चला है। यदि मामले की जांच गंभीरता एवं पूरी इमानदारी से चली तो दो सौ करोड़ तक की लकड़ी चोरी सामने आती है तो आश्चर्य नहीं होगा।
राजस्व विभाग भी घेरे में
लकड़ी कटाई की जांच-पड़ताल शुरू होने से राजस्व विभाग के कई नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार एवं आरआई जांच के दायरे में आने के साथ ही मामले में आरोपी बनाए जा सकते है। इस जांच के शुरू होने से वन विभाग के साथ राजस्व विभाग में भी हड़कंप मचा है। अधिकारी अपने आकाओं से मामले को दबाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा रहे है तथा पुलिस पर बेगुनाहों को फंसाने का आरोप लगाकर मामले को प्रभावित करने भी कोशिशें शुरू हो गई हैं।
चालक गिरफ्तार
वन उपज चोरी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी के ड्राइवर पीरू खान और संतोष केलकर को गिरफ्तार किया है। उनसे सघन पूछताछ की जा रही है। आरोपी राकेश की चोरी की वनोपज को ट्रक से सप्लाई करते थे। इनसे पुलिस लकड़ी कहां-कहां खुदबुर्द की गई, इसकी जानकारी ले रही है।
...वर्जन...
पुलिस टीपी घोटाले के साथ अब पेड़ों की अवैध कटाई के मामले की भी जांच शुरू कर दी है। जल्द ही प्रकरण में कुछ नए आरोपी सामने आ सकते है।
Ñ-गौरव तिवारी, एसपी, बालाघाट
होमगार्ड को अन्य विभागों की नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण
डीजीपी मैथिलीशरण गुप्त ने प्लाटून कमांडर की दीक्षांत में ली सलामी
जबलपुर। डायरेक्टर जनरल होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस मैथिलीशरण गुप्त ने होमगार्ड प्रशिक्षण केन्द्र मंगेली में प्लाटून कमांडर के 24वें दीक्षांत समारोह में कहा कि शासन ने हमारे प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है, अब अन्य विभागों में स्थई नौकरी की भर्ती मे होमगार्ड के जवानों को 30 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
उन्होंने उपस्थित होमगार्ड एवं आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि इस संस्थान से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी परिवीक्षाधीन प्लाटून कमांडर सक्रिय सेवा के क्षेत्र
में कदम रख रहे हैं। आशा की जा रही है कि सभी जवान गौरवशाली समाज के लिए समर्पित होकर अपनी सेवा करें।
उन्होंने कहा कि होमगार्ड का भविष्य अन्य विभागों की तुलना में उज्ज्वल रहे। आज होमगार्ड प्रभावी ने जीवन रक्षक के रूप में समाज में सामने आया है। जहां कहीं भी प्राकृतिक आपदाएं आई हैं, वहां होमगार्ड ने अहम भूमिका का निर्वाह किया है। हम दावे से कह सकते हैं कि एसडीआरएफ के जवान न केवल लोगों की जान बचाएंगे, बल्कि इमरजेंसी आॅपरेशन भी साथ में चलाएंगे। उन्होंने कहा कि हम यदि किसी की जान बचा सकते हैं तो यह हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने बताया कि होमगार्ड भोपाल में ऐसी ढांचा तैयार कर रहा है कि
इन्टनेशनल सेटेलाइट के माध्यम से आपदा के समय कार्य कर सकेगा। हम सभी सिविल डिफेंस वॉलेंटियर को होमगार्ड से जोड़ने का कार्य कर रहे है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान मंगेली में 83 करोड़ की लागत से संस्थान को विकसित किया जाना है, जिसकी डीपीआर शासन के पास भेजी गई है।
बैंड को पुरस्कृत किया
दीक्षांत समारोह के दौरान सीटीआई के बैंड के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करे हुए 10 हजार रुपए नकद पुरस्कार की घोषणा भी की। उन्होंने कम समय में बेहतर बैंड तैयार करने की भी प्रशंसा की। उन्होंने डिवीजन स्तर पर भी बैंड दल तैयार करने के लिए कहा।
34 प्रशिक्षार्थी पास आउट
केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान होमगार्ड मंगेली में 24वें दीक्षांत समारोह में 34 परिवीक्षाधीन प्लाटून कमांडर पास आउट हुए। इस अवसर पर शानदार परेड का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीजीपी होमगार्ड मैथिलीशरण गुप्त एवं श्रीमती गुप्त थे। इस अवसर पर आईजी होमगार्ड केएस राठौर, डीआईजी होमगार्ड विशद तिवारी, कलेक्टर शिवनारायण रूपला, एसपी डॉ. आशीष, सीनियर स्टाफ अपूर्व शुक्ला, श्रीमती प्रीति बाला सिंह, महेन्द्र पन्द्रे, टीआर चौहान, राजेश जैन, आशीष खरे तथा अन्य उपस्थित थे। 

नसबंदी के बाद भी हो गए जुड़वां बच्चे


-बालाघाट के किरनापुर ब्लॉक की पीएचसी का मामला, आदिवासी परिवार हुआ शिकार
जबलपुर। बड़वानी के आंख फुड़वा कांड की सुर्खियों के बीच समीपवर्ती बालाघाट जिले के किरनापुर-किन्ही स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र में लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। इस मामले में गजब का कमाल हुआ कि नसबंदी के बाद भी एक आदिवासी महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दे दिया। गरीबी के बीच किसी तरह जीवन यापन करने वाले इस परिवार पर दो बच्चों का यह जन्म जहां एक बड़ी मुसीबत की तरह बनकर टूटा है वहीं जिम्मेदार इसे सामान्य घटना मान रहे हैं।
बताया जाता है कि किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत किन्ही निवासी मनोज उइके के पहले से दो बच्चे हैं। मनोज ने अपनी पत्नी पत्नी सीता बाई का एक साल पहले नसबंदी आॅपरेशन कराया था। साल भर बीतने के बाद सीता बाई उइके फिर से गर्भवती हो गई। इसे आदिवासी परिवार ने ईश्वरीय लीला मान कर स्वीकार कर लिया। पिछले दिनों सीता बाई को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उसे उप स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया, जहां उसकी डिलीवरी कराई गई। जच्चा और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं पर आदिवासी परिवार इसे लेकर बेहद परेशान है।
इस संबंध में बीएमओ किरनापुर डॉ. एनआर रंगारे ने बताया कि किसी
कारण से नसबंदी आॅपरेशन फेल हो गया। मनोज उईके ने पत्नी के गर्भवती होने की सूचना आंगनबाड़ी एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र में दर्ज कराई थी। वह गर्भपात नहीं कराना चाहता था। इसलिए उसे सरकारी दर से मुआवजा देने की तैयारी की जा रही है।
बाक्स..
जुड़वां होने पर भी उतनी ही क्षतिपूर्ति
नसबंदी कराने के पीछे व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य रहता है कि उसको दो बच्चे होने के शासकीय लाभ मिले तथा उसको अनचाहे बच्चों की परवरिश में अनावश्यक खर्च न करना पड़े, लेकिन ऐसे मामले में मात्र 30 हजार रुपए क्षतिपूर्ति दी जाती है, जबकि पालक को बच्चे पालने में बहुत बड़ा खर्च आता है। वहीं शासकीय योजनाओं के लाभ से भी वे वंचित होते हैं। चिकित्सीय सूत्रों का कहना है कि क्षतिपूर्ति सिर्फ आॅपरेशन फेल होने का दिया जाता है। जुड़वां बच्चा होने पर भी एक बच्चे के हिसाब से 30 हजार क्षतिपूर्ति दी जाती है। पूर्व में ऐसे मामलों के लिए शासन बीमा कराया करती थी, लेकिन अब बीमा भी बंद कर दिया गया है।

...वर्जन...
मैंने पत्नी की नसबंदी कराई थी। इसके बावजूद पत्नी गर्भवती हो गई तो गांव वालों के समझाने पर इसको ईश्वर की मर्जी मान लिया। बाद में जुड़वा बच्चे हुए तो लगता है कि अब इनकी परवरिश निश्चित तौर पर एक बड़ी मुश्किल से कम नहीं है। नवजात दोनों बच्चे स्वस्थ हैं। शासन से मुआवजा के लिए आवेदन किया है। डॉक्टर ने क्षतिपूर्ति दिलवाने का आश्वासन दिया है।
मनोज उइके,
जुड़वां बच्चों का पिता
फेल हो जाते हैं आॅपरेशन
नसबंदी आॅपरेशन कई बार फेल हो जाते हैं। इसके लिए नसबंदी कराने वाली महिला को 30 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है।  गर्भधारण होने के बाद प्रकरण तैयार कर प्रमाण पत्र सहित शासन को भेज दिया गया है। मुआवजा राशि महिला को दिलाई जाएगी।
डॉ. केके खोसला
सीएमएचओ, बालाघाट