Friday, 5 February 2016

एमपी का गिद्ध एटलस होगा तैयार


* गणना से आशांन्वित वन अमला
* जीपीएस सिस्टम से गिद्धों के ठिकाने चिन्हित  हुए

जबलपुर। प्रदेश में गिद्धों के पहले चरण की गणना से वन अमला बेहद आशान्वित है। दरअसल अनुमान से अधिक गिद्ध गणना में टीम को मिले है, इसके साथ ही गिद्धों के ठिकाने खोजने में अमला कामयाब हुआ है। इन ठिकानों को जीपीएस सिस्टम से पहचाना गया है और अब गिद्ध के ठिकानें के जो नक्शे तैयार हुए है, उसका एटलस तैयार करने का काम शुरू किया जा रहा है।
गणना के दौरान  बड़ी संख्या में प्रवासी गिद्ध भी मिले है। दरअसल उनका वास्तविक ठिकाना मध्य प्रदेश में न होकर प्रदेश के बाहर है। उल्लेखनीय है कि ं अब तक गिद्धों के ठिकाने का कोई रिकार्ड वन अमले के पास नहंी था लेकिन इस गणना से नक्शा काफी स्पष्ट होने लगा है।  मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली गिद्धों की प्रजाति के ठिकाने तो खोजे गए है, इसके अतिरिक्त बाहर के  प्रदेश से आने वाले गिद्धों के यहां मौजूद उपनिवेश भी खोजे गए  है। इन सब को जल्द ही  एटलस में उतारा जाना  है।
घोंसलों का होगा उल्लेख
इस गिद्ध एटलस में बकायदा जीपीएस सिस्टम के तहत गिद्धों के मौजूदगी की वास्तविक ठिकानों का उल्लेख किया जाएगा। गिद्ध  के नक्शे में उनके  घोसले के साथ वे कहां कहां पाए जाते है, इसको दर्शाया जाएगा। इस गिद्ध एटलस के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी कि गिद्ध के संरक्षण के लिए क्या किया जाए।
67 गिद्ध पाए गए
जानकारी के अनुसार  प्रदेश भर में 876 स्थानों में गिद्धों के ठिकाने चिंहाकिंत किए गए है।  प्रदेश मे पहली चरण की गणना  में  लगभग 67 सौ गिद्ध पाए गए  है। गिद्ध गणना में मैपिंग में जिन स्थानों में सर्वाधिक गिद्ध पाए गए है, वहां संरक्षण के लिए शासन की बड़ी योजना प्रारंभ करने जा रहा है। इसमें  श्योरपुर, मंदसौर,  रायसेन, भोपाल, तथा दमोह जिले को प्रमुखता में रखे जाने की संभावना है।
की जा रही समीक्षा
गिद्धों के पहले चरण की गणना के बाद इसकी समीक्षा का दौर शुरू कर दिया  गया। इसमें खासतौर पर अनेक स्थानों में  दुर्गम क्षेत्रों में पाए जाने वाले प्रवासी गिद्ध भी देखे गए है। इसके बावजूद अनेक स्थानों में  अपेक्षा से कम गिद्ध भी मिले है। जिसको लेकर उनके प्रवास पर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।  वन विभाग  गिद्ध गणना की नोडल एजेंसी भारतीय वन प्रबंधन संस्था भोपाल के माध्यम से मई माह में गिद्धों के दूसरे चरण की गिनती शुरू करने वाला है। इस दौरान जो क्षेत्र गणना से छूट गए हैं, वहां गणना की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिन जिलों में गणना हो चुकी है , वहां गणना की पुष्टि के लिए फिर से गणना की जानी है।
वर्जन
गिद्धों की गणना में पहली बार प्रदेश में मौजूद गिद्धों की वास्तविक संख्या आई है। जल्द ही एक  एटलस तैयार किया जा रहा है जहां गिद्धों के प्रवास सहित अन्य तरह की जानकारी मौजूद होगी।  इन इलाको को संरक्षित करने भी योजना बनाई जाएगी।
आरके श्रीवास्तव
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

No comments:

Post a Comment