पुलिस की सक्रियता के बावजूद अपराधी रहे बेखौफ
चाकूबाजी और तेजाब के मामले में देश भर में बदनाम रहे इस शहर में वर्ष 2015 में अपराध और अपराधी सिर चढ़कर बोलते रहे। वर्ष भर लोगों के घरों में चोरियां होती रही। लगभग हर माह हत्या , बलात्कार और लूट की संगीन वारदातों की एफआईआर थाने में दर्ज हुई। शहर को संजीवनी नगर और गोसलपुर जैसे नए थाने मिले। इसी वर्ष नए पुलिस अधीक्षक डॉ आशीष ने जिले की कमान संभाली। शहर में कानून व्यवस्था की लगाम करने पुलिस प्रशासन को वर्ष भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी
वर्ष 2015 के अपराधों के आेंकडे बता रहे है कि शहर में अपराध बढ़ रही हैं। बीते वर्ष की तुलना में 2015 में बलात्कार, लूट तथा चोरी जैसे संगीन अपराधों में बढ़ौतरी हुई है। संस्कारधानी के नाम से मशहूर जबलपुर जिले की आबादी 24 लाख के आंकड़े के आसपास है, जिसमें 7 तहसीलें और 1474 गांव हैं। शहर की यदि बात की जाए तो नगर निगम के तहत 79 वार्ड और 13 जोन हैं। जिले की सुरक्षा के लिए पुलिस, होमगार्ड, एसएएफ और आरएएफ की टीमें भी शहर में ही मौजूद रहती हैं। बावजूद इसके अपराधों का ग्राफ साल दर साल बढ़ता जा रहा है।
बाक्स
जिले में मौजूद पुलिस संगठन
जिले में कुल थानों की संख्या 39
जिले में चौकियों की संख्या 13
एडीशनल एसपी 6
सीएसपी 7
अन्य पुलिस बल 9000 लगभग
14 हजार अपराध दर्ज
आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अपनी ओर से भरपूर प्रयास किए, जिनमें उसे काफी हद तक सफलता भी मिली, लेकिन तू डाल डाल मैं पात पात वाली कहावत भी चरितार्थ होती रही। इस साल हत्या को छोड़ दिया जाए तो लगभग सभी तरह के अपराधों में बढौतरी हुई है। माइनर एक्ट के मामले मिलाकर करीब 14 हजार अपराध दर्ज किए हैं।
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वर्ष 2014 और 2015 में हुए अपराध एक नजर में -
अपराध की प्रवृत्ति 2014 2015
हत्या 92 82
हत्या का प्रयास 152 195
डकैती 0 4
्रडकैती का प्रयास 6 5
लूट 138 149
घर में हुई चोरी 580 734
साधारण चोरी 420 476
वाहन चोरी 592 798
बलवा 69 93
बलात्कार 134 147
फिरौती अपहरण 6 0
अन्य अपहरण 577 432
आर्म्स एक्ट 655 565
नारकोटिक्स एक्ट 128 64
साइबर क्राइम अप्राप्त 21
घटनाएं जो बनीं सुर्खियां
जनवरी-साल के शुरुआती माह जनवरी में 60 लाख रुपए की ठगी का खुलासा किया गया। दुबई के एक शेख के इशारे पर शहर के एक व्यक्ति के साथ 60 लाख रुपए की ठगी की गई थी, जिसमें पुलिस ने आरोपी को गुजरात से पकड़ने में सफलता हासिल की। हालांकि इस मामले में पुलिस के हाथ उस शेख तक नहीं पहुंच पाए, जो ठगी का मुख्य सरगना था।
फरवरी-रांझी थाने में पदस्थ एएसआई की बेटी से एकतरफा प्रेम के चलते मौसेरे भाई ने ही उसकी हत्या कर दी थी। मामले की छानबीन के दौरान पूरा पुलिस विभाग इस घटना से स्तब्ध था, वहीं रिश्तों को क लंकित करने वाली इस घटना ने समाज की बिगड़ती विचारधारा का भी उदाहरण पेश किया था।
मार्च-यह माह पुलिस के लिए चुनौती भरा रहा, जिसमें मदन महल स्टेशन के साइकिल स्टैंड के पूर्व संचालक द्वारा अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या का मामला कई दिनों तक चर्चा का विषय बना रहा। घरेलू कलह के कारण स्टैंड के पूर्व संचालक विवेक दुबे ने आक्रोश में आकर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया था। वहीं माढ़ोताल थानांतर्गत सूरतलाई में हाईवे के किनारे रहने वाले परिवार पर आधा दर्जन से ज्यादा नकाबपोशों ने धावा बोलकर 17 लोगों को बंधक बना लिया था। बाद में बदमाश लूट की वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। माह के आखिरी में हिरन नदी कटंगी में एक ही परिवार के तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। बच्चे को बचाने के चक्कर में पिता, पुत्र और नाती अकाल मृत्यु के शिकार हो गए थे।
अप्रैल-सिहोरा के खलरी महगवां गांव में आधा दर्जन से ज्यादा सशस्त्र बदमाशों ने लक्ष्मण पटैल के घर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। जिसमें उन्होंने परिवार के सदस्यों को बंधक बनाकर लाखों रुपए के नकदी जेवरात लूट लिए थे।
मई-इस माह की शुरुआत भूकंप के झटकों के साथ हुई थी। हालांकि शहर में इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू विभाग के द्वारा अपने ही रिश्तेदार को धमकाने का मामला महीने भर छाया रहा। डीन प्रदीप बिसेन ने खुद को कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का छोटा भाई बताते हुए रिश्तेदार को उठवा लेने की धमकी दी थी, जिससे प्रदेश की सत्ता में भी काफी खलबली मच गई थी। माह के आखिरी में पुलिस अधीक्षक हरिनारायणाचारी मिश्र के स्थान पर डॉ. आशीष ने पदभार संभाला।
जून-माह के शुरुआती दिनों में एनएसयूआई पर हुए लाठीचार्ज से सियासत गरमा गई। शिक्षा मंत्री के पुतला दहन को लेकर पुलिस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई थी, जिसमें पुलिस ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। वहीं रेलवे हॉस्पिटल में डॉक्टर की लापरवाही से कर्मचारी की पत्नी की मौत हो गई थी, जिस पर कई दिनों तक बवाल मचा रहा।
जुलाई-शहर में अपराध की दर घटने पर नहीं आ रही थी वहीं छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में राधास्वामी इंस्टीट्यूट में ईओडब्ल्यू का छापा पड़ने से कॉलेजों में हड़कंप मच गया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरुण शर्मा की दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से पूरा स्वास्थ्य जगत स्तब्ध था।
रेलवे के जीएम की बेटी की शादी में हर अधिकारी को 50-50 हजार रुपए का गिफ्ट देने का आॅडियो भी सामने आया जिसने रेलवे में खलबली मचा दी।
अगस्त-इस माह में अपराध तो सामान्य रहे, लेकिन जैन समाज द्वारा किया गया आंदोलन प्रदेशभर में चर्चा में रहा। राजस्थान की हाईकोर्ट द्वारा संल्लेखना और संथारा को लेकर दिए गए आदेश के बाद जैन समाज आक्रोशित हो गया और लाखों की संख्या में एकजुट होकर मौन जुलूस निकाला।
सितंबर-केंट के शातिर बदमाश बबलू पंडा ने अपनी दासता पत्नी मंजू सोधे को बीच सड़क पर गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। फरारी के दौरान भी उसने अपने ही गुर्गे संजय रजक की भी हत्या कर दी थी। इसी दौरान डीमेट घोटाले में डॉ. एमएस जौहरी की गिरफ्तारी से डॉक्टरों में हड़कंप मचा रहा।
अक्टूबर-नवरात्र और दशहरा के कारण यह माह पुलिस के लिए साल का सबसे संवेदनशील माह रहा। पुलिस के लाख प्रयास करने के बाद भी धार्मिक उन्माद फैलाने वाले सक्रिय रहे, वहीं दशहरा जुलूस में गोसलपुर में काल बनकर आए ट्रक ने 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
जिससे पूरे शहर और प्रदेश में महीने भर सनसनी मची रही।
नवंबर-यह माह आयकर विभाग के छापों के कारण इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। आयकर विभाग के आधा सैकड़ा अधिकारियों द्वारा करीब एक दर्जन कारोबारियों के कार्यालय और निवास पर एक साथ छापामारी की गई। जिससे उद्योग जगत में दहशत का माहौल रहा। वहीं मुर्रई में आधी रात को एक घर में चोरों ने धावा बोलकर परिवार के सदस्यों को बंधक बना लिया और लूट की वारदात को अंजाम दिया।
दिसंबर-साल का आखिरी महीना होने के अलावा इस माह में कुछ ऐसी घटनाएं भी रहीं, जिन्होंने शहर भर में खलबली मचाए रखी। फिल्म दिलवाले का विरोध हुआ तो वहीं मेडिकल कॉलेज से नवजात बच्चे की चोरी ने प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया। वहीं शहर में गश्त और पुलिस को तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से 40 एफआरवी यानी फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल प्रदान किए गए, जिससे काफी हद तक अपराधों में खौफ बढ़ रहा है।
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