सरकार कह रही 40, विपक्ष का दावा 158 मरे, अब सिर्फ न्याय ही सहारा
जबलपुर। व्यापमं मामले से जुडेÞ लोग एवं आरोपियों की लगातार हो रही मौत से एक और मुद्दा खड़ा हो गया है। विपक्ष इस मामले में होने वाली मौतों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। व्यापमं मामले की जांच के चलते राज्यपाल के पुत्र सहित अब तक 40 आरोपियों की मौत हो गई है, जबकि विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे का दावा है कि व्यापमं मामले में 158 लोगों की मौत हो चुकी है। इनकी मौत की वजह और मरने वालों की सूची सरकार सार्वजनिक नहीं कर रही है।
जानकारी अनुसार मध्य प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा मामला व्यापमं घोटाला है, इसमें सर्वाधिक 2500 आरोपी बनाए गए हैं और मामले में आरोपियों की संख्या अब भी बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इस महाघोटाले में अब तक अलग-अलग 55 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर हाल ही में व्यापमं मामले में जांच के लिए 20 विशेष कोर्ट गठित की गई है। इसका उद्देश्य ही रहा है कि व्यापमं मामले में जल्द न्याय मिल सके। मामले में जुड़े आरोपियों को जमानतें मिलना भी आसान नजर नहीं आ रहा है। इसके साथ ही अनेक आरोपी अपने को निर्दोष मान रहे हैं। पिछले तीन साल से चलने वाली जांच के दरमियान आरोपियों की मौतों का सिलसिला भी थम नहीं रहा है। उनकी मौत के पीछे आखिर क्या वजह है? इसको लेकर पुलिस कुछ भी स्पष्ट नहीं कर पाई है। इसी तरह अनेक छात्र ऐसे हैं, जिनका पूरा जीवन इस मामले में दांव पर लगा है और उनमें तेजी से अवसाद की स्थिति निमर््िात हो रही है। बहरहाल इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए त्वरित न्याय के लिए स्पेशल कोर्ट गठित की जा चुकी है।
विपक्ष ने लगाए आरोप
व्यापमं मामले में अब तक 40 आरोपियों की मौत को लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस इसे संदिग्ध बता रहा है। विधानसभा में विपक्ष के नेता सत्यदेव कटारे का कहना है कि मृतकों में अनेक व्यापमं मामले में बड़े राजदार रहे हैं। उनकी मौत ही अपने आप में एक बड़ा सवाल है, बहरहाल हाल ही में लक्ष्मीनारायण शर्मा की भी जेल में मौत होने की आशंका संबंधित चर्चा सुर्खियों में रही है।
न्याय की उम्मीद खो चुके हम
व्यापमं मामले में हम लोग न्याय की उम्मीद पूरी तरह से खो चुके हैं। यह मामला निर्दोषों की मौत का कारण बनता जा रहा है। शासन ने इस मामले में अब तक 40 आरोपियों की मौत होना स्वीकार किया है, लेकिन शासन ने अब तक इन 40 मौतों की कोई सूची सार्वजनिक नहीं की है। मेरे पास जो जानकारी उपलब्ध है, उसमें 158 लोगों की जानकारी शामिल है। व्यापमं घोटाले में सिर्फ आरोपियों की ही नहीं, बल्कि छात्रों और उनके अभिभावकों, प्राध्यापकों सहित अन्य कई लोगों की मौतें हुई हैं। इन मौतों में वे लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं, जो व्यापमं मामले में आरोपी तो नहीं थे, लेकिन व्यापमं घोटाले के राज जानते थे, घोटालेबाजों की प्रताड़ना के शिकार थे। मेडिकल कॉलेज जबलपुर के डॉ. शाकल्ये भी व्यापमं घोटाले की बलि चढ़े हैं। मामले में हमें न्याय की कोई उम्मीद नहीं हैं, इतने बड़े घोटाले में यदि सीबीआई जांच के आदेश दे दिए जाते तो क्या फर्क पड़ता? सुनियोजित तरीके से व्यापमं मामले में गड़बड़ी सरकार ही कर रही है।
सत्यदेव कटारे, नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा, मप्र
प्रमुख संदिग्ध मौत
राज्यपाल के पुत्र शैलेष सिंह, मौत की वजह जहर।
फार्मासिस्ट विजय सिंह, मौत की वजह अज्ञात
इंदौर की छात्रा-नम्रता खुदकुशी का संदेह
व्यापमं मामला एक नजर में
पंजीबद्ध प्रकरण-55
आरोपी - 2500
गिरफ्तार - 1980
गिरफ्तारी शेष- 550
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ये हैं विशेष अदालतें
अति. जिला सत्र न्यायालय- न्यायधीश
भोपाल राम कुमार चौबे, अरुण कुमार वर्मा, भूपेन्द्र कुमार सिंह, बीएस भदौरिया, दिनेश प्रताप सिंह,
ग्वालियर-सतीश शर्मा, धरमिंदर सिंह, अनिल कुमार सुहाने
जबलपुर-सुनील कुमार जैन
रीवा-अरुण सिंह
इंदौर-दिलीप कुमार मित्तल
खंडवा-प्रकाश चंद्रा
मरेना-राकेश मोहन प्रधान
भिंड-दीपक कुमार अग्रवाल
दमोह-देवेन्द्र देव द्विवेदी
छतरपुर-रामगोपाल सिंह
गुना-पीसी गुप्ता
सागर-अजीत सिंह
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