Thursday, 11 February 2016

अनुशासन और मेहनत ही अधिकारी की पहचान


 आशीष खरे, एएसपी जबलपुर
 सन 1998 बैच के मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन के अधिकारी आशीष खरे ने जबलपुर में एएसपी क्राइम के पद पर रहते हुए अनेक गंभीर बहुचर्चित  प्रकरणों एवं बड़े गिरोहों की धरपकड़ के लिए ख्याति अर्जित की। श्री खरे का कहना है कि विभाग में अनुशासन और मेहनत ही अधिकारी की पहचान बनाते है। उनका हाल ही में तबादला एएसपी शहर के पद पर किया गया है। इसके पूर्व वे भिंड, शाजापुर, भोपाल, बालाघाट, पीएचक्यू भोपाल में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। । श्री खरे से पीपुल्स संवाददाता दीपक परोहा की हुई बातचीत के अंश।
प्रश्न- जबलपुर में आप  एएसपी क्राइम पदस्थ रहें हैं, क्राइम ब्रांच की किसी शहर में क्या उपयोगिता है?
जवाब- कई प्रकरण ऐसे होते है जो बहुचर्चित होने के साथ समाज में एक संदेश भी देते है। प्रकरण का सुलझना और अपराधी का पकड़ा जाना समाज के लिए बेहद आवश्यक होता है। ऐसे गंभीर मामले में जब थाने की पुलिस संसाधनों की समस्या सामने आती है, मामले की जांच का क्षेत्र विस्तृत होता है तब क्राइम ब्रांच बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है। क्राइम ब्रांच का पूरा ध्यान अपराध अंवेषण पर केद्रित होता है। इसके चलते क्राइम  ब्रांच पुलिस में बेहद उपयोगी शाखा के रूप में उभर कर विभाग में आया है।
प्रशन- थाना में लॉ एण्ड आर्डर की समस्या से पुलिस को जूझना पड़ता रहता है, ऐसे में अपराध अंवेषण में पिछड़ जाती है। मामले पेडिंग रहते है, क्या थानों में लॉ एण्ड आर्डर एवं अपराध अंवेषण के लिए अलग अलग विंग क्या होना चाहिए?
जवाब - पुलिस मुख्यालय इस विषय पर काफी अर्से से विचार कर रहा है। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि कार्य विभाजन से बेहतर परिणाम आते हैं।
प्रश्न- एक अच्छे पुलिस अधिकारी में क्या खूबी होना चाहिए जिससे वह विभाग में अपना नाम कमा सके?
जवाब- एक पुलिस कर्मी एवं अधिकारी दोनो में अनुशासन में रहते हुए मेहनत

से काम करने का गुण होना चाहिए। इससे वह निश्वित ही नाम कमाएगा।
प्रश्न- आपका यादगार केस कौन सा है?
जवाब- सिविल लाइन जबलपुर में एक मासूम बच्ची आरोही का अपहरण की रिपोर्ट की गई थी, ये काफी चर्चित हुआ। जबलपुर सहित प्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। अपहरण के दिन गृह मंत्री भी शहर में थे, उन्होंने भी मामले को प्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार किा। इस गंभीर प्रकरण में पहले से ही बच्ची की मां पर संदेह था लेकिन कोई भी ठोस प्रमाण नहीं थे। मामले की विवेचना में सैकड़ों पुलिस कर्मियों ने रात दिन मेहनत की , अंतत: प्रकरण का पर्दाफाश हुआ। बच्ची की ही मां ने ही मासूम आरोही का कत्ल किया था। इस प्रकरण में क्राइम ब्रांच का विशेष योगदान रहा। ये प्रकरण मेरा यादगार केस है।


No comments:

Post a Comment