350 लोगों को कर रही प्रशिक्षित, सौ लोगों को दिला चुकी रोजगार
मूक वधिर को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए 22 वर्षीय खुशबू ने जो कार्य किया है, वो कार्य एक समाज सेवी को करने में अपना पूरा जीवन बिताना पड़ जाता है। खुशबू ने बचपन से सैकड़ो मूक बधिरों के जीवन में खुशबू बेखेरी है। उनको समाज में नौकरी-पेशा दिलाकर सम्मान के साथ जीने के लायक बनाया है। इतना ही नहीं सैकड़ो मूक बधिरों को सांकेतिक भाषा सिखाकर उन्हें अभिव्यक्ति और संवाद के योग्य बनाकर उनके जीने का मकशद दिलाया है।
खुशबू को ये प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली है। उसके पिता राकेश कुमार सोनी तथा मां जयवंती सोनी मूक बधिर है। जब से उसने होश संभाला है तो उसके माता-पिता को उसने बोलते नहीं देखा। हमेशा इशारे में ही बात करते थे। उन्हें सुनाई भी नहीं देता था। उसने स्कूल शिक्षा प्राप्त करना शुरू की और उसके साथ सीखी सांकेतिक भाषा। सांकेतिक भाषा पढ़ना उसके लिए काफी जरूरी हो गया था क्योंकि उसे माता-पिता की बात समझना रहती थी। जब उसने सब कुछ सीख लिया तो उसे हर चीज आसान लगने लगी। अपने माता-पिता के साथ हंसने बोलने लगी। उसके बाद उसे उन्ही से प्रेरणा मिली और प्रेरणा का फल यह हुआ कि उसने सैकड़ो बच्चों को सांकेतिक भाषा सिखाई और उन मूक बधिर बच्चों को रोजगार के काबिल लाकर खड़ा कर दिया। वर्तमान में वह 350 बच्चों का वह ध्यान रख रही है। वहीं सौ लोगों को वह रोजगार दिला चुकी है।
मानसिक बच्चों का ध्यान
खुशबू मंदबुद्वि बच्चों के साथ मूक बधिर बच्चों की देख भाल के अलावा पढ़ाने का काम जस्टिस तन्खा मेमोरियल स्कूल पचपेढ़ी सिविल लाइन में कर रही है। यहां वह चार से पांच घंटे रोज देती है और उसके बाद शाम को लार्डगंज थाना परिसर में स्थापित मूक बधिर केन्द्र में बच्चों को पढ़ाती है।
रोजगार के लिए करती है मजबूत
खुशबू ने मूक बधिर केन्द्र के पचास से अधिक बच्चों को स्क्रीन, प्रिटिंग, डीटीपी ट्रेनिंग सहित अन्य रोजगार से संबंधित कार्यो की ट्रेनिंग दिला रही है। जिससे वे स्वंय का कार्य कर सके या फिर कही नौकरी कर सके।
दया का पात्र नहीं बनाया जाए
खुशबू का कहना है कि मूक बधिर को दया का पात्र न बनाया जाए। इसके लिए पूरे समाज के साथ सरकार को भी व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना चाहिए। स्कूल व कॉलेजों में उनके लिए भी स्थान होना चाहिए जिससे वे पढ़ाई कर सके।
मेरे रंग में रंगने वाली
मेरे रंग में रंगने वाली लाईफ ओके में नाटक आता है। उसमें मूक बधिर का किरदार है। उस किरदार में रोल करने वाली साईड हीरोईन को भी प्रशिक्षण खुशुबू ने मुंबई में रहकर दिया है। उसका कहना है कि वह मूक बधिर के लिए दिन रात सेवा करती रहेगी और उन्हें हर फील्ड में लाकर खड़ा करना चाहती है। इसके लिए उसके माता-पिता पूरा सपोट करते है। उसके पिता ने 79 ने मूक बधिर लोगों को जोड़ा था और उसके कुछ दिन बाद समय के अभाव के कारण कमेटी टूट गई थी। पिता की तरह वह भी एक संस्था बनाएगी और उसमें मूक बधिर लोगों को जोड़ेगी, जिससे उन्हें समाज की मुख्य धारा में जोड़ सके।
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