कृषि विश्व विद्यालय में तैयार हो रही वंशावली
जबलपुर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय द्वारा दुर्लभ एवं विलुप्त हो रहे मेडिसन प्लांट पर गहन खोज चल रही है। जहां विश्व विद्यालय में मेडिसन प्लांट की जींस बैंकिंग के तहत नर्सरी तैयार की गई है। इसके अलावा इन प्लाटों के जैनेटिक अध्यन का प्रोजेक्ट चल रहा है।
विश्व विद्यालय के वैज्ञानिक जंगलों में मिलने वाली दुर्लभ औषधीय प्लांट के जींस कोड तैयार कर पौधों की उत्पत्ति उनके विकास क्रम का अध्ययन का कार्य चल रहा है। विश्व विद्यालय के बायो टैक्नालॉजी सेंटर में औषधीय पौधों के जेनेटिक कोड तैयार किए जा रहे हैं जिसको डीएनए प्रिंटिंग प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है।
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय के पूर्व डायरेक्टर अनुसंधान डॉॅ एसएस तोमर ने बताया कि कृषि विश्व विद्यालय में औषधीय पौधों को बचाने के लिए गहन अनुसंधान गत वर्ष से प्रारंभ किए गए हैं। इसके तहत पौधों के जींस से उनकी अनुवांशिक उत्पत्ति के सम्बंध में अध्ययन किया जा रहा है। इसकी मदद से जहां पौधों का बायो कोड तैयार होगा। इस कोड के तैयारर होने के बा इस प्लांट के बारे में अनेक अनसुलझे रहस्य से पर्दा उठेगा। इसको बचाने तथा मौसम के अनुकूल जीवित रहने की क्षमता का भी अध्ययन किया जा सकेगा। औषधीय पौधों को विलुप्त होने से बचाने में ये अनुसंधान काफी सहायक होगा।
उल्लेखनीय है कि जबलपुर से लगे जंगली क्षेत्र मंडल, निवास, अमरकंटक, शहडोल, उमरिया, पचमढ़ी, होशंगाबाद, दमोह आदि में बड़ी संख्या में दुर्लभ जड़ी बूटियों मौजूद है। इसके अध्ययन एवं खोज की आवश्यकता भी है।
इस अध्ययन कार्य से विलुप्त होती औषधीय पौधों की प्रजाति को बचाया जाएगा। इसके अतिरिक्त लगभग 100 से अधिक औषधीय प्रजातियां खोजी गई है जिनके बारे में अब तक बहुत कम ही अध्ययन हुए थे।
डॉ. शरत तिवारी
डायरेक्टर बायोटैक्टिनीकल सेंटर
जेएनकेविवि जबलपुर
किया जा रहा रिसर्च
जेनिटक कोड पर विश्व विद्यालय सिर्फ भारत भी के वैज्ञानिकों के साथ ही नहीं बल्कि विदेशी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रिसर्च कर रहे है। हमने गेहूं की कई प्रजातियों के जैनेटिक कोड तैयार किए हैं। इसके अतिरिक्त बायो टेक्नालॉजी विभाग मे औषधीय पौधों के डीएनए फिंगर प्रिंट पर भी कार्य किया जा रहा है।
डॉ वीएस तोमर
कुलपति जेएनकेवीवी
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