Wednesday, 14 September 2016

मानवीयता का दिखाई खाकी ने, शव निकलवा कर किया अंतिम संस्कार


जबलपुर। यहां से करीब 40 किलोमीटर दूर कुण्डम तहसील के अनेक आदिवासी बाहुल्य गांव ऐसे है जहां आदिवासी परिवारों में इस हद की गरीबी है कि घर में कोई व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसको जलाने के लिए लकड़ी तक के रूपए  नहीं होते है। ऐसी ही परिस्थितियों में देवहरा गांव में 20 अगस्त को एक ही परिवार के दस लोगों को दफनाना पड़ा था, प्रशासन से कोई मदद नहीं पहुंच  पाई थी। अर्से बाद खाकी ने कुछ ऐसा किया जिसको  लेकर खाकी को सेल्यूट करने का मन करेगा।
जानकारी के अनुसार कुड़म थाना के टिटहां कला ग्राम में रहने वाला महिनस उर्मिला आदिवासी ने रविवार को अपने घर पर आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शव को पीएम  के लिए भेजा तथा पीएम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
 भूमिहीन है परिवार
 बताया गया कि जिस परिवार में  महिला की मौत हुई थी, वह भूमिहीन एवं बेहद गरीब परिवार था। महिला को अंतिम संस्कार करने के लिए लकड़ी खरीदने के लिए रूपए नहंी थे। कुण्डम तहसील में गरीब आदिवासियों के पास यदि अंतिम  संस्कार करने के लिए रूपए है तो वे लकड़ी खरीद कर विधि विधान से मृतक का अंतिम  संस्कार करते है ओर यदि  अंतिम संस्कार के लिए  रूपए नहंी है तो आदिवासी गड़ढा खोद कर लाश को दफना देते है।
दो गज जमीन भी नसीब नहीं
 बताया गया कि इस परिवार के पास ऐसी जमीन भी नहंी थी कि अपनी स्वयं की जमीन पर शव को दफनाने के लिए दो गज जमीन नसीब नहंी हुई। इस पर इस परिवार ने सड़क के किनारे शासकीय जमीन पर गड़्ढा खोद कर दफना दिया।
थाना प्रभारी सक्रिय हुए
 बताया गया कि गरीब के कारण लाश को सड़क के किनारे दफनाए जाने की जानकारी थाना प्रभारी प्रकाश ठाकुर को लगी तो वे तुरंत ही मौके पर पहुंचे। सड़क के किनारे गड़ढे में दफाए  जा रहे शव को निकलवाया। उन्होंने अपने पास से रुपए देकर लकड़ी मंगवाई और महिला का अंतिम संस्कार विधान पूर्वक करवाया।
प्रशासन क्यों नहीं करता
सवाल उठता है कि ऐसे गरीबों के अंतिम संस्कार के लिए पंचायत तथा जिला पंचायत आखिर क्यो कोई कदम नहंी उठाता ह जबकि उसके सामने देवहरा गांव  की घटना है जिसके कारण पूरे प्रशासन तंत्र का शर्मसार होना पड़ा था। शहपुरा डिंडौरी में सड़क हादसे में एक ही परिवार के दस लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। डिंडौरी पुलिस ने शव को मृतकों के गांव तक पहुंचा दी। एसडीएम कुण्डम को सूचना भी दी गई लेकिन रुपए के अभाव में एक परिवार के दस लोगों को अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी नसीब नहंी हुई। इस शर्मसार करने वाली घटना के बाद  कलेक्टर सहित प्रशासनिक अफसरों ने ग्राम का दौरा किया। कलेक्टर ने चौपाल लगाई, लेकिन क्या हुआ तहसील के अन्य गांवों में अब भी  लाशों को लकड़ी और दो गज जमीन नसीब नहीं हो रही है।

 वर्जन
 मुझे पता चला कि गरीबी के कारण महिला का अग्नि संस्कार नहंी हो पा रहा है तो मानवता के नाते मदद की, सक्षम लोगों को इस तरह की मदद के लिए  तत्पर रहना चाहिए। प्रकाश ठाकुर
थाना प्रभारी कुण्डम

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