Thursday, 14 April 2016

50 जिलो की 130 नदी, नालों को किया जाएगा पुनर्जीवित


प्रदेश सरकार ने कसी कमर

जबलपुर। जल ही जीवन है और इसे बचाने के लिए जितनी जवाबदारी सरकार की है उतनी ही आम लोगों की। मप्र सरकार भी कुछ इसी तरह का प्रयास करने जा रही है। 50 जिलो की 130 नदियों तथा नालों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने बेड़ा उठाया है। इसके लिए आम लोगों की सामूहिक सहभागिता को भी जोड़ा जा रहा है। जिससे जल संकट कभी न निर्मित हो सके। प्रदेश के बुंदेलखण्ड इलाका ऐसा है जहां गर्मी के दिनों में पानी की जल संकट सबसे अधिक रहता है इसके पीछे पानी के संरक्षण के लिए किसी तरह का कदम नहीं उठाया जाना पाया गया है। अब नदी, पोखर तथा नालोें के संरक्षण के लिए बनी योजना लाभकारी होगी। इस प्रयास के लिए मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तथा सामजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव खुद आगे बढ़कर जलाभिषेक अभियान के तहत कार्य कराना शुरू कर दिया है।
पेय जल आपूर्ति वाले स्थलों की पहचान
सरकार ने सबसे पहले ऐसी नदी व नालोें को चिन्हित किया है,जो कभी अपने स्थान विशेष के जीवन रेखा होती थी और अब वे सूखी हो गयी हैं। इन सभी नदियों को प्रदेश में चल रहे जलाभिषेक अभियान के तहत युद्ध स्तर पर पुनर्जीवित करने का कार्य सामूहिक सहभागिता से किया जा रहा है।  जहां से पीने के पानी की सप्लाई हो सके। इसके लिए स्थानीय नगर पालिका, नगर निगम, पंचायतों में आने वाले फण्ड का उपयोग किया जाएगा।
इन्हें किया जाएगा पुनर्जीवित
भोपाल में चमारी नदी, हलाली नदी, वाह्य नदी, सीहोर में सीवन नदी, कोलांस नदी, उलझावन नदी, पार्वती नदी, विदिशा में बेस नदी, बेतवा नदी, केथन नदी, रायसेन में बारना नदी, हलाली नदी, बेतवा नदी, राजगढ़ में पावर्त नदी, नेवज नदी, उज्जैन में क्षिप्रा के नालें, शाजापुर में भाटन नदी, देवास कालीसिंध एवं उसकी सहायक नदियां, रतलाम में जामण नदी, मंदसौर करनाली नाला, नीमच में बोरखेड़ी नदी, बड़वानी में देब नदी, इंदौर में क्षिप्रा नदी, धार में बाघिनी नदी, मान, मंडावदी, उरी, माही, खुज नदी, चामला, नालछा, बलवन्ती, नर्मदा (मनावर) दिलावारा, सादी, धुलसार, खरगौन में खैर कुण्डी नाला, बंधान नाला, हिसलानी नाला, दसनावल नाला, रामकुला नाला, बनिहार नाला, चिचलाय नाला, सिरस्या नाला, खारिया नाला, झाबुआ में पंपावती नदी, नौगावां नदी, सोनार नदी, नेगड़ी नदी, धोबजा नदी, खण्डवा में कालधयी नदी, बुरहानपुर में महोनानदी, उतरवली नदी, जबलपुर में साकौर नदी, बालाघाट में कन्नौर नदी, छिंदवाड़ा में दुधी नदी, कटनी में निवार नदी, मंडला में झामल नदी, नरसिंहपुर में सीगरी नदी, सिवनी में सागर नदी, रीवा में ओड्डा नदी, सतना में अमहानला, सीधी में कुडेर नदी, झिरिया नदी, रेही, सनई, बेनी, तेंदुआ, नरकुई, खामदई, लोबई नदी, सूखा नाला, सिंगरौली में बदिर्या नाला, सागर में सोनार नदी, छतरपुर में श्यामरी नदी, टीकमगढ़ में पटैरिया नदी, पन्ना में मिढ़ासन नदी, दमोह में कोपरा नदी, ग्वालियर में महुअर, नदी, कांठी नदी, अंडेरी नदी, सिरसी नदी, नगदा नदी, भसुआ नाला, बुड़ नदी, शिवपुरी में सरकुला नदी, साडर का नाला, पारोछ नदी, पार्वती का नाला, अशोकनगर में छेवलाई नदी, दतिया में चरबरा नाला, घूधसी नाल, दुर्गापुर नाल, पठारी नाला, बडौनकला नाला, चिरोल नाला, हिनोतिया नाला, बसई नाला, धोर्रा नाला, टोडा नाल, राधापुर नाला, श्योपुर में सीप नदी, अहेली नदी, कोसम नदी, सरारी नदी, बांसुरी नदी, कुंआरी नदी, ईडर (पार्वती), मुरैना में सांक नदी, सोन नदी, आसन नदी, भिण्ड में बेसली नदी, बैतूल में पूर्णा नदी, ताप्ती नदी, होशंगाबाद में दूधी, पलकमती, मोरन, गंजाल, किवलारी, हथेड़ नदी तथा छोटी नदी, नाले भाजी, निमाचा, इंद्रा एवं लुंगची, हरदा में माचक नदी, सयानी नदी, सांवरी नदी, उमरिया में कथली नाला, डिंडोरी में गोमती नदी, शहडोल में लोरखाना नाला, चूंदी नदी और अनूपपुर में ठेमा नाला, टिपान नदी, बसनिहा नाला, शिवरी चंदास नाला, केवई नदी शामिल हैं।

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