Thursday, 14 April 2016

भविष्य की रेल, बिजली भी उत्पादन करेगी


 सोलर एनर्जी तैयार करने
 वाली एक कोच तैयार
जबलपुर। बढ़ती हुई बिजली की जरूरत को देखते हुए रेलवे स्वयं अपनी जरूरतों के लिए बिजली उत्पादन की दिशा में सोचने लगा है। भविष्य में कोच को और सुविधा सम्पन्न और बनाया जाता है तो निश्चित ही ऊर्जा की और जरूरत पड़ेगी। यदि सब कुछ ठीक ठाक चला तो निकट भविष्य में ट्रेन की बोगियों में ही बिजली उत्पादन होगा। रेलवे के इस सपने को साकार और कोई नहीं अक्षत ऊर्जा स्रोत यानी सौर ऊर्जा एवं विंड ऊर्जा ही करेगी।
इस दिशा में पश्चिम मध्य रेलवे ने पहल शुरू कर दी है। यहां एक कोच ऐसा तैयार करवाया गया है, जिसकी छत पर सोलर पैनल लगाया गया है। दिनभर सूरज की किरणों से बिजली बनती रहती है। इसी तरह विंड एनर्जी के उपयोग का भी भविष्य में इस्तेमाल हो सकता है। इसके लिए प्लेटफॉर्म

की छतों तथा रेलवे अपनी भूमि पर विंड ऊर्जा उत्पादन की दिशा में काम कर सकता है। पश्चिम मध्य रेलवे जोन के इंजीनियर इस दिशा में लगातार प्रयोग और शोध कर रहे हैं। कोटा रेल मंडल में विंड ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए गेट पर टॉवर लगाया गया है। यह टॉवर सिर्फ प्रयोग के तौर पर लगाया गया है।
भविष्य की बोगियों की मांग
भविष्य में यदि यात्री की सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है। वाईफाई, मिनी एसी, पेंट्रीकारों में हीटर तथा ऊर्जा के अन्य संसाधन बढ़ते हैं और बोगियों में वर्तमान डिमांड से अधिक बिजली की जरूरत पड़ती है तो प्रदूषण रहित बिजली उत्पादन ट्रेनों में क्यों न किया जाए? इस पर रेलवे विचार कर रहा है।
छतों पर होगा उत्पादन
बोगियों की छतों पर सोलर प्लेट लगाई जा सकती है और उससे काफी ऊर्जा उत्पादन होगा। इसको प्रयोग के चलते पश्चिम मध्य रेलवे ने सोलर एनर्जी से लैस एक कोच तैयार भी कर लिया है। इस बोगी का निर्माण
वर्तमान तो पमरे ने बाहर से कराया है, लेकिन पश्चिम मध्य रेलवे में ऐसे इंजीनियरों की फौज मौजूद हैं। जिन्हें साजो-सामान उपलब्ध हो जाएगा तो वे सोलर प्लेट वाली बोगियों की लाइन लगा सकते हैं।
गर्मी में होगी उपयोगी
गर्मी में ट्रेन में नॉन एसी में यात्रा करने वाले यात्री को भीषण गर्मी में सफर करना पड़ता है। इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस ने रेलवे कोच की छतों पर सोलर सीट फिट करने की सलाह दी है, जिससे कोच में गर्मी भी कम रहेगी और इसके साथ बोगी में बिजली की आपूर्ति भी होगी। इससे डीजल तथा बिजली की किफायत भी होगी। वर्तमान में एसी कोच में करीब 25 किलोवाट बिजली की खपत होती है, जबकि नॉन एसी कोच में पंखे और लाइट के लिए करीब 15 किलोवाट बिजली की जरूरत पड़ती है।
...वर्जन...
बोगियों पर सोलर पैनल लगाने का कार्य फिलहाल एक बोगी में प्रयोग की तौर पर किया गया है। रेलवे की

अन्य बोगियों पर सोलर पैनल लगाने का कोई विचार एवं प्रस्ताव नहीं है। भविष्य की संभावनाओं को तलाशते हुए सिर्फ रेलवे इंजीनियर्स प्रयोग कर रहे हैं। इसी तरह विंड एनर्जी पर भी रेलवे प्रयोग कर रहा है।
पीयूष माथुर, सीपीआरओ, डब्ल्यूसीआर

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