Wednesday, 6 April 2016

रकार ने कमाए पंजीयन में 3 हजार 876 करोड़


रीयल स्टेट के कारोबार में मंदी नजर नहीं आई स्टॉम्प ड्यूटी में 

जबलपुर। वित्तीय वर्ष 2014-15 को रियल स्टेट के कारोबार के लिए मंदी का वर्ष माना गया और सैकड़ों बिल्डरों ने अपने प्रोजेक्ट भी बंद कर दिए लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्रियां , एग्रीमेंट तथा मुख्त्यार नामा जमकर हुए। स्टॉम्प डियूटी से पंजीयन विभाग ने पूरे प्रदेश से 3 हजार 876 करोड़ रूपए कमाए जबकि गत वित्तीय वर्ष 2013-14 मे करीब 3 हजार 600 करोड रूपए कमाए थे। पंजीयन विभाग के आॅला अफसरों का मानना है कि भले ही स्टॉम्प की बिक्री बढ़ी  है लेकिन रियल स्टेट के कारोबार मंदी का असर बना हुआ  है। अनेक जगह लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो पाई है जबकि वित्तीय वर्ष 2014-15 के पूर्व के दो वर्षो में शत-प्रतिशत लक्ष्य के करीब विभाग रहा है। बहरहाल स्टॉप बिक्री से होने वाले आय के आंकड़े यही जाहिर कर रहे है कि जमीन-जायदाद की खरीदफरोख्त में विशेष अंतर नहीं आया है। 
डीआई पंजीयक नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 2012-13 तथा वर्ष 2013-14 में रियल इस्टेट के कारोबार में तेजी से उठाव आया था। शहरी क्षेत्र में प्रापर्टी बिक्री के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भी संपत्तियां बड़ी तादात में बिकी। दूर दराज के गांवों में इंवेस्टमेंट किए गए लेकिन गत वित्तीय वर्ष में इस तरह के इंवेस्टमेंट में गिरावट आई है लेकिन औसतन संम्पति की खरीद बिक्री का काम चल रहा है। 
शासन ने भी रियल स्टेट के कारोबार में गिरावट को नजर रखते हुए कलेक्टर गाइड लाइन निर्धारण में पूरे प्रदेश में 5 फीसदी से अधिक बढ़ौतरी नहीं की गई। दरअसल की इसकी मुख्य वजह यही थी कि जब रियल स्टेट का जब कारोबार उठाव में था तभी कलेक्टर गाइड लाइन बढ़ाई गई। वित्त मंत्रालय की मंशा थी कि करारोपण न्यायोचित होना चाहिए जिसके कारण कलेक्टर गाइड लाइन में ज्यादा इजाफा नहीं किया गया है। रियल स्टेट के कारोबार को 

बढ़ावा देने के लिए विकासशील एवं निर्माणाधीन क्षेत्रों में करारोपण कम ही रखा गया है। यह भी ध्यान रखा गया कि जिन क्षेत्र में संपत्ति की खरीद बिक्री ज्यादा होती है वहां भी ज्यादा बढौतरी नहीं की गई है। बहरहाल मंदी के बावजूद महाकौशल एवं विन्ध्य क्षेत्र में स्टॉप ड्यूटी लक्ष्य से अधिक अर्जित की गई है। नई गाइड लाइन से उम्मीद है कि स्टॉम्प की बिक्री को इस वर्ष जो निर्धारण किया जा रहा है उसके करीब हम पहुंच जाएंगे। लक्ष्य का निर्धारण पूर्व वित्तीय वर्ष से 2 से 5 प्रतिशत अधिक रखा जाता है। जबलपुर, रीवा एवं 
शहडोल संभाग में हम लगभग लक्ष्य के करीब रहे। इन संभाग में कुल कारोबार 710 करोड़ का हुआ है।  
जिले       लक्ष्य  - प्राप्त करोड़ 
बालाघाट 38      28.5
छिंदवाड़ा  72   76.8
ंिडंडौरी   5    5.87
जबलपुर  190  210
कटनी  55      39.5
मण्डला  12 13.6
नरसिंंहपुर  35      36.85
रीवा  86     86
सतना  104   90.5
सिवनी  35  30.21
शहडोल  24  26.64
सीधी      13  15.71
उमरिया  7  7.4
अनूपपुर  9  8.35
सिंगरौली  42  33.9  

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