जबलपुर। जंगली जानवर भी आदमी को मार कर नहीं खाते हैं। कभी कभी टाइगर आदमखोर हो जाते हैं, लेकिन कुत्ते आदमखोर होते है, ऐसा कम ही देखने और सुनने को मिलता है किन्तु जबलपुर मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित जुनवानी गांव के डेढ़ दर्जन आवार कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं। ये मानना ग्रामीणों और प्राणी विशेषज्ञों का है।
कुत्ते आदमखोर कैसे हुए है, इसको लेकर पड़ताल चल रही है। दरअसल कुत्ते हिंसक होकर आदमी पर हमला नहीं कर रहे बल्कि वे जंगली जानवर की तरह घेर कर आदमी को शिकार कर रहे है। गांव में रामदीन और रमेश नामक व्यक्ति को जब कुत्तों ने घेर कर उसे काटा और उसका मांस चोथने और जान से माने कोशिश की तो पता चला कि गांव के कुछ कुत्तों का बरताव आदम खोर की तरह हो गया है। गांव में एक दर्जन से अधिक लोगों को कुत्ते बुरी तरह से काट चुके हैं।
जबदस्त खौप
कुत्तों के खौफ के कारण गांव में अकेले कोई दिशा मैदान के लिए नहंी जा रहा है। जबदस्त दहशत लोगो में व्याप्त है। कब कहां से कुत्ते आ जाए और उन्हें शिकार बना ले।
जानवरों पर आफत
गांव में करीब एक दर्जन से अधिक बछड़े तथा बकरियों को मार कर ये आवारा कुत्ते पूरी तरह खाकर चट कर चुके है। रोटी और जूठन से पलने वाले कुत्ते मांस भक्षी और शिकारी प्रवृति के हो चुके है।
मारने का निर्णय
पिछले दिनों गांव में जिला प्रशासन के अधिकारी तथा ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने प्राणी विशेषज्ञ के साथ दौरा किया। कुत्तों की प्रवृति को देखते हुए उनको मारने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही इस संबंध में अधिकृत आदेश जारी होने की संभावना है।
वर्जन
कैसे बदली प्रकृति
गर्मियों में स्कूल बंद होने पर मध्यान भोजन नहंी पका और बासी एवं जूठन से गांव में पलने वाले आवारा कुत्तों को खाने के लिए मिलना बंद हो गया। गांव के मरने वाले जानवर को खुले में फेंका जाता था जिसे खाकर कुत्ते मांस भक्षी हुए और उनकी प्रकृति भी बदल गई।
मनीष कुलश्रेष्ठ
प्राणी विशेषज्ञ
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